हिमालयीलोग यह एक शुरूआत है। हिमालय के लोगों के बारे में जानकारी देश-दुनिया को देने की। इतिहास की किताबों, पत्र-पत्रिकाओं, संग्रहालयों में कहीं भी तो हमारी संस्कृति, हमारे इतिहास, हमारे पुरखों आदि की समुचित जानकारी दर्ज नहीं है। हम हिमालयी राज्यो के राजाओं के इतिहास की बात नहीं कर रहे हैं। इतिहास की पुस्तकों के पन्ने सिर्फ विदेशी आक्रांताओं...
उत्तराखंड के फलों में एक ऐसा फल जिसे सिर्फ सोचकर मुह में पानी आ जाता है वह है हिसर, hisar या हिंसालु ।यह फल चीड़ के जंगल में पाया जाता है। अक्सर यह फल माल मवेशी चराने वाले बच्चे तोड़ कर लाते हैं और फिर सब इसके मीठे स्वाद का मजा लेते हैं। इसे अंग्रेजी में हिमालयन येलो रसबेरी...
तमांग ने कैसे पहचाना अपना पति? अरुणाचल प्रदेश की लोक-कथा
परिकल्पना- डा. हरीश चंद्र लखेड़ा /हिमालयीलोग की प्रस्तुति/नयी दिल्ली
दोस्तों, मैं जर्नलिस्ट डा. हरीश चंद्र लखेड़ा इस बार सुदूर प्रांत अरुणाचल प्रदेश की लोककथा आपके लिए लेकर आया हूं। जब तक मैं कहानी को लेकर आगे बढूं, इस हिमालयीलोग चैनल को लाइक और सब्सक्राइब कर दीजिए।
अरुणाचल प्रदेश में तमांग नाम की...
परिकल्पना- डा. हरीश चन्द्र लखेड़ा
हिमालयीलोग की प्रस्तुति, नई दिल्ली
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पहाड़ में हंसी ठठा करते हुए अथवा चिढ़ाने के लिए ठाकुरों के लिए खसिया बोल दिया जाता है। बदले में ठाकुर भी ब्राह्मणों के लिए भाट शब्द का प्रयोग कर देते हैं। यह व्यंगवार सदियों से चल रहा है।
उत्तराखंड में खस या खसिया कहने पर कई...
परिकल्पना- डा. हरीश चन्द्र लखेड़ा
हिमालयीलोग की प्रस्तुति, नई दिल्ली
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स्वर्ग को लेकर बात शुरू करने से पहले ही मैं साफ कर देना चाहता हूं कि यह वीडियो पौराणिक गाथाओं पर आधारित है। भारतीय जीवन में पौराणिक गाथाओं का बड़ा महत्व है। इसे नकारा नहीं जा सकता है। स्वर्ग की अवधारणा सिर्फ हिंदुओं में है, ऐसा नहीं है। अब्राहमिक...
himalayan studies
77 साल 7 माह व 7 दिन आयु होने की प्रतीक्षा क्यों करते हैं नेवारों के बुजुर्ग ? -नेपाल के नेवार समाज का इतिहास
admin -
परिकल्पना- डा. हरीश चन्द्र लखेड़ा
हिमालयीलोग की प्रस्तुति /नई दिल्ली
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दोस्तों मैं जर्नलिस्ट डा. हरीश लखेड़ा, हिमालयी जातियों के इतिहास की श्रृंखला में इस बार नेपाल के प्राचीन समाज नेवार को लेकर जानकारी दे रहा हूं। नेवार समाज की कुछ विशेषताएं हैं, जो की सभी समाजों के लिए अनुकरणीय हैं। नेवारों को लेकर जानकारी देने से पहले आप सभी से...
Research papers
राष्ट्र गान और आजाद हिंद फौज के तरानों की धुन बनाने वाले महान गोरखा फौजी को भूल गए हम !
admin -
उत्तराखंड से हिमाचल बसे नेपाली मूल के गोरखा कैप्टन राम सिंह ठकुरी को जानते हैं आप?
परिकल्पना- डा. हरीश चन्द्र लखेड़ा
हिमालयीलोग की प्रस्तुति, नई दिल्ली
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कैप्टन राम सिंह ठकुरी। (Captain Ram Singh Thakuri) जी हां। यह नाम उन महान हस्ती का है जिसकी बनाई धुनें आजादी के दीवानों की जुबां पर रहती थी। आज भी ये गीत...
देहरादून। ग्लोबल वार्मिंग के चलते मैदानों की वनस्पतियां अब पहाड़ों की ओर जाने लगी हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में वानस्पतिक विज्ञानियों के अध्ययन के अनुसार तापमान में वृद्धि के कारण मैदानी क्षेत्रों में पनपने वाली अनेक वनस्पतियां अब पहाड़ों की ओर रुख करने लगी हैं।
वैज्ञानिक अध्ययन में उत्तराखंड के सोमेश्वर घाटी में साल वृक्षों की बढ़वार में तेजी...
History of Himalaya
हिंदू नहीं हैं पर खुद को बताते हैं ब्राह्मण! नेपाल के ब्राह्मणों का इतिहास
admin -
परिकल्पना- डा. हरीश चन्द्र लखेड़ा
हिमालयीलोग की प्रस्तुति /नई दिल्ली
दोस्तों, मैं जर्नलिस्ट डा. हरीश चंद्र लखेड़ा हिमालयी क्षेत्र की जातियों के इतिहास की इस श्रृंखला में इस बार नेपाल के ब्राह्मणों को लेकर जानकारी लाया हूं। मैं जब तक इस कहानी को आगे बढाऊं, आपसे अनुरोध है कि इस चैनल को लाइक और सब्सक्राइब कर अवश्य दीजिएगा।
इससे पहले मैं उत्तराखंड...
नई दिल्ली।मोक्षदायिनी गंगा राष्ट्रीय नदी का दर्जा मिल जाने पर भी मैली ही है । इसे निर्मल व अविरल बनाने के लिए बाद में गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण भी बनाया गया, नमामि गंगे योजना भी चल रही है। तब से लगभग आठ हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा राज्यों को दे दिये गये, लेकिन आज भी कोई नहीं कह...




























