अफगानिस्तान में कभी गाई जाती थी वेदों की ऋचाएं
परिकल्पना- डा. हरीश चन्द्र लखेड़ा
हिमालयीलोग की प्रस्तुति, नई दिल्ली
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अफगानिस्तान और पाकिस्तान को छोड़कर भारत वर्ष के इतिहास की कल्पना नहीं की जा सकती। अफगानिस्तान 7वीं सदी तक अखंड भारत का एक हिस्सा था। अफगानिस्तान में कभी वेदों की ऋचाएं गाई जाती थी। अफगान पहले एक...
पहाड़ के जजमानों में मात्र २० प्रतिशत हैं मैदानी क्षत्रिय
परिकल्पना- डा. हरीश चन्द्र लखेड़ा
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उत्तराखंड में क्षत्रियों को जजमान भी कहा जाता है। गढ़वाल के जजमान यानी राजपूतों, यानी ठाकुरों यानी क्षत्रियों के बारे में बताने से पहले मैं पहले ही साफ कर देता हूं कि यह जानकारी विभिन्न पुस्तकों से एकत्रित की गई है।...
तो इस तरह बनें ब्वेई और ईजा शब्द
-डा. हरीश चंद्र लखेड़ा
शोध और आलेख- डा हरीश चंद्र लखेड़ा
दोस्तों, मांजी -पिताजी के लिए विश्वभर में जो भी संबोधन होता है, उसमें से अधिकतर देशों में मां शब्द की ध्वनि अवश्य होती है। परंतु उत्तराखंड के गढ़वाल में मां के लिए ब्वेई तथा कुमायुं में ईजा संबोधन है। नेपाल में आमा कहा...
परिकल्पना- डा. हरीश चन्द्र लखेड़ा /
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कश्मीर घाटी - ऋषि कश्यप के वंशजों की इस घाटी में हिंदू साम्राज्य कैसे ढह गया और कैसे वहां इस्लाम फैलता चला गया। लंबे समय बाद फिर से कैसे फिर से हिंदू शासन आया। यह रोचक कहानी है। यह आश्चर्य का विषय है कि भारत के इतिहास के पुस्तकों...
जै हिमालय, जै भारत।
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उत्तराखंड के गांवों के किसी भी परिवार में 1863 तक शराब पीने वाला एक भी व्यक्ति नहीं था। तत्कालीन कुमायुं के सीनियर कमीश्नर ने 1863 में आबकारी विभाग को भेजी रिपोर्ट में लिखा था कि पहाड़ के लोग नशे के व्यसन से मुक्त...
कुमायुं के जजमानों का इतिहास
परिकल्पना- डा. हरीश चन्द्र लखेड़ा
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इस मामले में मैं पहले ही साफ कर देता हूं कि मैं इतिहास का उल्लेख कर रहा हूं। किसी को महिमामंडित करने का मेरा कोई उद्देय नहीं है। कुमायुं के जजमानों को लेकर इस आलेख का आधार कुमायुं केसरी बद्रीदत्त पांडे, इतिहासकार डा. शिवप्रसाद डबराल...
खस परिवार कानून (The khasa Family Law) - द्वितीय कड़ी
परिकल्पना- डा. हरीश चन्द्र लखेड़ा
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भारत में विवाह को लेकर अब जो कानून लगातार बनते जा रहे हैं, वे तो हिमालयी क्षेत्र में सदियों पहले से थे। परंतु मैदानों के कट्टर और रूढ़िवादी लोगों के दबाव में पहले तो अंग्रेजों व बाद में भारत सरकार ने...
चौहानों को क्यों कहा गया असवाल, ननस्वाल, रावत, नेगी और रमोला
वीर चौहान राजपूतों की गाथा
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भारतीय इतिहास में चौहानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह वीर राजपूत जाति देश के विभिन्न क्षेत्रों की तरह हिमालयी राज्य उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी बड़ी संख्या में बसी है। उत्तराखंड में उप्पूगढ़...
New Studies
कत्यूरियों की वीरगाथा से कैसे जुड़े हैं महारानी ध्रुवस्वामिनी और महान सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य
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उत्तराखंड के कत्यूरी खस वीरों ने बंदी बनाया था रामगुप्त, शकों ने नहीं
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इतिहास के विद्यार्थी जानते हैं कि भारत में महान गुप्त साम्राज्य भी रहा है। बाकी के लिए पहले गुप्त साम्राज्य के बारे में बता देता हूं। गुप्त राज्य प्राचीन भारत के प्रमुख राजवंशों में से...
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जै हिमालयी-जै भारत। हिमालयीलोग टूट्यूब चैनल में आपका स्वागत है।
मैं हूं जर्नलिस्ट डा. हरीश चंद्र लखेड़ा। इस बार एक ऐसा विषय लाया हूं, जिसे पर बोलने से पहले साफ कर देता हूं कि मेरा उद्देश्य किसी का अपमान करना अथवा किसी का दिल दुखाना नहीं है। मेरा उद्देश्य तो मात्र उस...



























