विकास चाहिए तो केंद्र पर दबाव बनाएं हिमालयी राज्य
ले. जनरल मदन मोहन लखेड़ा (पूर्व राज्यपाल मिजोरम)
जनरल लखेड़ा का मानना है कि आजादी के बाद हिमालयी राज्यों का जिस तेजी से विकास होना चाहिए था, वह नहीं हुआ है। जल और जंगल समेत अधिकतर प्राकृतिक संसाधन हिमालयी राज्यों के हैं, लेकिन उनका फायदा मैदानी लोगों को ज्यादा मिलता है। वह...
तालिबान और उत्तराखंड के लैंड जेहादियों का एक ही है सूत्रधार
परिकल्पना- डा. हरीश चन्द्र लखेड़ा
हिमालयीलोग की प्रस्तुति /नई दिल्ली
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अफगानिस्तान में आप लोग तालिबानियों की हरतकों तो देख रहे हैं। किस तरह से वे लोग अपने ही सजातीय व सधर्मी लोगों पर अपना खौफ बढ़ा रहे हैं याद कीजिए, लुटेरे गजनी, गौरी, बाबर, तैमूर लंग व अब्दाली का दौर। कल्पना...
नैनीताल। झीलों के लिए प्रसिद्ध शहर नैनीताल की नैनी झील संकट में है। इसमें पानी का स्तर लगातार घट रहा है। इसकी वजह झील को भरने वाले स्रोत सूख रहे हैं और नैनीताल में जमीन से रिसने वाले जल में आई कमी आई है। झील नियंत्रण केन्द्र के अनुसार विगत सौ सालों के रेकॉर्ड को देखते हुए यह साफ...
विलुप्त हो रही है गोरैया (घंड्यूड़ी)
---नंंदनी बड़थ्वाल
नई दिल्ली। गोरैया, जिसे उत्तराखंड में घंड्यूड़ी कहा जाता है, आज विलुप्त होती जा रही है। दिल्ली में तो बहुमंजिला इमारतें बन जाने से इसका आशियाना ही छिन गया है। इसलिए यहां कबूतर तो बढ़ रहे हैं, लेकिन गोरैया बहुत कम दिखती है।
दिल्ली सरकार ने इस राज्यीय पक्षी घोषित तो किया है, लेकिन...
नई दिल्ली। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में 3000 गांव पूरी तरह खाली हो गए हैं और ढाई लाख से ज्यादा घरों में ताले लटके हुए हैं। ये सरकारी आंकडे हैं। गैर सरकारी आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है। समृद्ध पहाड़ी शैली में निर्मित हजारों भव्य मकानों में घास व झाड़ियां उग गई हैं। पूरे के...
नई दिल्ली। हिमालय क्षेत्र में तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर के कारण नई झीलों का निर्माण हो रहा है। ये स्थानीय लोगों खतरा बनती जा रही हैं। पिछले दो सालों में तेजी से पिघलते ग्लेशियरों के कारण हिमालय क्षेत्र में 110 नई झीलों का निर्माण हुआ है। इससे ग्लोफ (ग्लेशियल लेक ऑउटबर्स्ट फ्लड) बाढ़ का खतरा पैदा हो गया...
देहरादून। ग्लोबल वार्मिंग के चलते मैदानों की वनस्पतियां अब पहाड़ों की ओर जाने लगी हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में वानस्पतिक विज्ञानियों के अध्ययन के अनुसार तापमान में वृद्धि के कारण मैदानी क्षेत्रों में पनपने वाली अनेक वनस्पतियां अब पहाड़ों की ओर रुख करने लगी हैं।
वैज्ञानिक अध्ययन में उत्तराखंड के सोमेश्वर घाटी में साल वृक्षों की बढ़वार में तेजी...
Himalayilog Foundation
दिल्ली में होगा अब वह काम जो दो दशक में भी नहीं कर पाई उत्तराखंड सरकार
admin -
गढ़वाली, कुमायुंनी और जौनसारी भाषाओं का मानक तय करने कवायद
दिल्ली गढ़वाली, कुमायुंनी और जौनसारी अकादमी की पहल
परिकल्पना- डा. हरीश चन्द्र लखेड़ा
हिमालयीलोग की प्रस्तुति, नई दिल्ली
जै हिमालय, जै भारत। हिमालयीलोग के इस यूट्यूब चैनल में आपका स्वागत है।
मैं जर्नलिस्ट डा. हरीश चंद्र लखेड़ा। उत्तराखंड की तीन प्रमुख भाषाओं, गढ़वाली, कुमायुंनी और जौनसारी का मानक स्वरूप तय करने को लेकर...
दिल्ली से लेकर देश-विदेश में इस लेख को पढ़ने वाले दोस्तो क्या आपने कभी अपने पुरखों के बनाए पुंगड़ों (खेतों) को याद किया है। जिन पुंगड़ों को बनाने में कई पीढ़ियां खप गईं होगी, उन्हें छोड़ने में हमने कोई वक्त नहीं गंवाया।
दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में पल बढ़ रही पीढ़ी को भद्वाड़, सारी, पुंगड़ा, सगोड़ा, स्यारा, उखड़ जैसे शब्दों...
हिमालयीलोग यह एक शुरूआत है। हिमालय के लोगों के बारे में जानकारी देश-दुनिया को देने की। इतिहास की किताबों, पत्र-पत्रिकाओं, संग्रहालयों में कहीं भी तो हमारी संस्कृति, हमारे इतिहास, हमारे पुरखों आदि की समुचित जानकारी दर्ज नहीं है। हम हिमालयी राज्यो के राजाओं के इतिहास की बात नहीं कर रहे हैं। इतिहास की पुस्तकों के पन्ने सिर्फ विदेशी आक्रांताओं...



























