विकास चाहिए तो केंद्र पर दबाव बनाएं हिमालयी राज्य ले. जनरल मदन मोहन लखेड़ा (पूर्व राज्यपाल मिजोरम) जनरल लखेड़ा का मानना है कि आजादी के बाद हिमालयी राज्यों का जिस तेजी से विकास होना चाहिए था, वह नहीं हुआ है। जल और जंगल समेत अधिकतर प्राकृतिक संसाधन हिमालयी राज्यों के हैं, लेकिन उनका फायदा मैदानी लोगों को ज्यादा मिलता है। वह...
मंगलेश डबराल समकालीन हिन्दी कवियों में चर्चित नाम हैं। हिंदी जगत में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले मंगलेश डबराल का जन्म 16 मई 1948 को काफलपानी गाँव, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड में हुआ। शिक्षा-दीक्षा देहरादून में हुई। दिल्ली आकर हिन्दी पैट्रियट, प्रतिपक्ष और आसपास में काम करने के बाद वे भोपाल में मध्यप्रदेश कला परिषद्, भारत भवन से प्रकाशित साहित्यिक त्रैमासिक...
जम्मू विश्वविद्यालय में पत्रकारिता व जन संचार विभाग के प्रुमख डा. गाविंद सिंह सज्जनता का दूसरा नाम हैं।  दिल्ली में पत्रकारिता में लंबी पारी खेल चुके डा. गोविंद सिंह अब पत्रकार तैयार करने में लगे हैं। इससे पहले वे उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी में पत्रकारिता व जन संचार विभाग के प्रुमख रहे हैं। डा. गोविंद सिंह जैसे बहुत कम लोग...
नई दिल्ली। भाजपा के मीडिया विभाग के राष्ट्रीय प्रमुख अनिल बलूनी अपनी लगन, कार्य और व्यवहार कुशलता से ही भाजपा में ऊंचाईयों तक पहुंचे हैं। भाजपा में  जिन नेताओं का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से सीधा संवाद होता है उनमें बलूनी भी शामिल हैं। काम के प्रति समर्पण को देखकर ही शाह ने बलूनी को भाजपा...
नई दिल्ली। हिमालयपुत्र हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म दिवस 25  अप्रेल, को देश भर में संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया. एक साधारण परिवार से सम्बद्ध , अकूत संघर्षों के मार्फ़त देश ही नहीं अपितु अंतर्राष्ट्रीय राजनीती में अपना विशिष्ठ स्थान बनाने वाली एक अदद हस्ती  थे, जिसने जन्म तो लिया गढ़वाल , उत्तराखंड के एक छोटे से...
शहीद श्रीदेव सुमन महान क्रांतिकारी थे।  श्रीदेव सुमन के संघर्ष ने टिहरी रियासत की चूलें हिला दी थीं। वे अहिंसावादी स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने टिहरी जेल में एक बार नहीं बल्कि दो बार आमरण अनशन किया। दूसरी बार 84 दिनों तक जेल के भीतर आमरण अनशन करते हुए श्रीदेव सुमन ने 25 जुलाई, 1944 को अपने प्राण त्याग दिये।  ...
प्रसिद्ध पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा का मानना है कि पिघलते ग्लेशियरों से लेकर चौतरफा संकटों से घिरे हिमालय के लिए अब चीन एक बड़े खतरे के तौर पर सामने आ गया  है। इसलिए भारतीय हिमालय विशेषतौर पर मध्य हिमालयी क्षेत्र से युवकों का पलायन रोकना जरूरी है। बहुगुणा की पदमादत्त नंबूरी से हुई बातचीत के प्रमुख अंश- -हिमालयी ग्लेशियरों को...
नई दिल्ली। दिल्ली से लेकर उत्तराखंड में जिस किताब से रामलीला का मंचन किया जाता है उसके लेखक थे छम्मी लाल ढौंडियाल। ढौंडियाल का दिल्ली में 23 अप्रैल को देहांत हो गया है । हिमालयीलोग  छम्मीलाल ढौंडियाल की भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। उनकी किताब का नाम था -- ‘श्री संपूर्ण रामलीला अभिनय’ । अब तक इस किताब के 20 संस्करण...
नई दिल्ली। उनके द्वार से कोई भी निराश हो कर नहीं जाता है। उत्तराखंड  ही नहीं, देश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग उनके पास मदद की आस लेकर आते हैं और वे उनकी मदद भी करते हैं। जी हां, बात हो रही है भोले महाराज औ माता मंगला जी की। उत्तराखंड मूल के संत दिल्ली में रहते हैं। उनका हंस...

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