किताब " उत्तराखंड आंदोलन : स्मृतियों का हिमालय "जल्दी ही प्रकाशित हो कर आने वाली है। देहरादून के समय साक्ष्य से यह पुस्तक प्रकाशित हो रही है।  इसमें लखेड़ा ने लिखा है कि-----   स्मृतियों के महासागर में से यह मात्र एक बूंद है। अथाह गहरे व अंतहीन महासागर की एक बूंद। इस बूंद को समेट पाना आसान नहीं था।...
हमारे बुजुर्ग जीवन की अंतिम बेला में किस कदर अकेले पड़ गए हैं, किस तरह से अकेलेपन में जी रहे हैं, किस तरह से स्मृतियों के सहारे  जीवन ढो रहे हैं, यह सब समझना है तो वरिष्ठ कथाकार डा. हरिसुमन बिष्ट  के नये उपन्यास - ‘भीतर कई एकांत ’ को अवश्य पढि़ए।   डा. हरिसुमन बिष्ट दिल्ली में मैथिली-भोजपुरी अकादमी...

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