उत्तराखंड और हिमाचल में बिच्छू घास का साग चाव से खाया जाता है।  उत्तराखंड में  इसे कंडाली, काल्डी आला व सिसौण आदि कई नामों से जाना जाता है। यह वही घास है जिसे पहाड़ों में कभी मास्टर जी बच्चों को सुधारने के लिए उपयोग करते रहे हैं। हिंदी में इसे बिच्छू घास या बिच्छू बूटी कहते हैं।  बिच्छू घास नाम...
अल्मोड़ा , चम्पावत या कोटद्धार आपको उत्तराखंड की प्रसिद्द बाल मिठाई  मिल जाएगी।  ऐसे खाने के बाद  बार-बार खाने को मन करता है।  इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है। यह मिठाई उत्तराखंड की मशहूर बाल मिठाई है। आपने अगर इसका नाम सुना है या पहले कभी खाया है तो आपको इसके स्वाद के बारे में हमें...
उत्तराखंड के पहाड़ों में लोगों ने अपनी आवश्यकताओं के अनुसार कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का इजाद किया है। इनमें  दाल, भात के साथ ही कपुलु, फाणु,  झ्वली, चैंसु , रैलु, बाड़ी, पल्यो, चुना (कोदा) की रोटी, मुंगरी (मक्का) की रोटी, आलू  की थिचोड़ी, आलू का झोल, जंगोरा का भात, जंगोरा,  अरसा, बाल मिठाई, भांग की चटनी, भट्ट की...
अरसा उत्तराखंड का प्रसिद्ध पकवान है। यह शादी व्याह और अन्य खुशी के मौके पर बनाया जाता है। कहा जाता है कि यह पकवान केरल से आया, जब आदि शंकराचार्य यहां आए थे। कुछ लोग मानते हैं कि यह पकवान उडीसा से आया। अरसा व्यंजन बनाने के लिए 250 ग्राम भीगे चावल, 100 ग्राम गुड़, 500 मिलीलीटर तेल की जरुरत...

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