ये ऊंचे- ऊंचे पहाड़ / बाट देखते रहे/ बाट देख रहे हैं / बाट देखते रहेंगे / कि मेरे / कभी न कभी / जरूर लौटेंगे. देवेन्द्र जोशी, देहरादून
ए मेरे पहाड़ कब तक तू/ अपनों की वापसी के लिए गिड़गिड़ायेगा / बहुत हुआ तू अब न अपने को यूँ तड़पाएगा/ जो गए वो अपने थे / लौट के आएंगे ये अब सपने है/ जो बचा है उसकी परवरिश की सोच/ नयी राहों की कर तलाश / बांस और निंगाल को तराश/ उफनती नदियों व् / धंसती धरती पर लगा अंकुश/ बृक्षों की पाट दे अपार श्रृंखला / पुष्पों...
पाण्डवखोली के समीप दूर्णागिरी द्रोणांचल शिखर माया-महेश्वर प्रकृति-पुरुष दुर्गा कालिका क्या हो तुम कहाँ हो तुम सिर्फ हिमालय में या मेरे संर्वाग में हाहाकार करती एक गहन इतिहास छुपाये हिमालय की तलहटी में वर्षो से  एक कौतुहल एक जिज्ञासा मेरी या अबाध आस्था कई बार देखा या यूँ कहो हर बार सुबह उठकर देखा "रानीखेत" से पल पल पिघलते हिमालय को कभी हरे,सफेद, धानी कभी नांरगी बनते फिर शाम के ढलते सूरज में सवंरती पहाड़ियों को वो साक्षी रही तब जब मेरी शिकायतों के अंबार थे किन्तु...
नेपाली या खस कुरा नेपाल की राष्ट्रभाषा है । यह भाषा नेपाल की लगभग ४४ लोगों की मातृभाषा  है। यह भाषा नेपाल के अतिरिक्त भारत के सिक्किम, पश्चिम बंगाल, उत्तर-पूर्वी राज्यों असं असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय तथा उत्तराखण्ड के अनेक भारतीय लोगों की मातृभाषा है। भूटान, तिब्बत और म्यानमार के भी अनेक लोग यह भाषा बोलते हैं।नेपाल भाषा...
नई दिल्ली। कुमायुंनी के साहित्यकार पूरन चंद कांडपाल और गढ़वाली भााषा के साहित्यकार मदनमोहन डुकलाण को क्रमश: 2016 और 2017 के लिए कवि कन्हैयालाल डंडरियाल साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया है। प्रसिद्ध संत भोले जी महाराज व माता मंगला जी और मुख्य अतिथि केन्द्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा ने इन साहित्यकारों के यह सम्मान दिया। यहां कंस्टिट्यूशन क्लब...
------- नीलम पांडेय नील कुछ नही बस .....यूँ ही खाली अक्षांश में सोयी हुयी नियति मात्र कभी रेतीले रेगिस्तान में चमकते पानी का सा भ्रम । जब सुबह और शाम के फर्क धुंधलाने लगते है तब रंगे हुऐ गगन में अलसाया सा सूरज भी अपनी तपिश में जलता अकसर अकेला रह जाता है । धरा की रोशनी होकर भी वह आने वाली शाम को उनींदी आखों में समेट चाँद के अनचाहे स्पर्श के सपने...
यह तेरा हिस्सा है/ कहकर छोटा-सा भू-भाग क्यों देते हो मुझे! / घेरा लगाकर सुंदर बनाने पर भी / यह मुझे कतई पसंद नहीं! / उस घेरे के भीतर / वह घर / उसके अंदर भी कमरे ही कमरे / उन कमरों के अंदर भी अपने-अपने / स्तर और स्थान हैं! / कैसा आश्चर्य! / कैसी चाह / कैसी प्रथा है यहां की ? / तुमुस छोटे से घेरे से घेरे...
पहाड़ के दुःख आपदा ग्रस्त असहाय लोग खाली पड़े मकान व् बंजर होती धरती वीरान होते प्रखंड बिरह अग्नि की ज्वाला दहक रही प्रचंड हे प्रवासी बंधुओ अब अपनी मातृ भूमि को न होने दो खण्ड खण्ड स्मरण रहे ये उत्तराखंड है अखंड/// जहाँ एक तरफ युवाओं का चौपट होता भविष्य है तो दूसरी ओर मादक पदार्थों का विषम विष है दूषित होती नदियां बर्गलाई जाती नाजुक कलियाँ हे प्रवासी बंधुओ अब अपनी मातृ भूमि को न...
"तेरा ठहराव तीरथ बने , तेरा फैलाव वरदान हो" .... पिछले दिनों नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा को एक जीवित संज्ञा माना। कोर्ट के इस निर्णय के अपने निहितार्थ हैं मगर जिस रोज यह आया, अब तक अज्ञात ही रहे कवि उमाशंकर बडूनी की रचना "गंगावतरण" सजीव हो उठी। कवि आज हमारे बीच में नहीं है और उनका काम भी उनके...
फूलों को कुचलते हुए दौड़ रहे हैं दिशाहीन हो हमारी नदियों और झरनों को रोक रहे हैं दिशाहीनता में इनकी दिशाहीनता अन्यमनस्कता में हृदयहीनता में हम पीड़ा ग्रस्त हो रहे हैं यह पृथ्वी रोगाक्रांत हो रही है यहां बैठकर मैं स्वयं को खा रहा हूं। मेरे हृदय में चरचरा रहे घाव की यह पीड़ा मात्र है, सिर्फ दर्द और टीस है। तुम जाओं इसी विश्वास में मैं भीगा लथपथ बैठा हूं। तुम...

FOLLOW ME

0FansLike
309FollowersFollow
4,699SubscribersSubscribe

WEATHER

- Advertisement -