नई दिल्ली। पेरिस के जलवायु सम्मेलन को दो साल हो चुके हैं।   तब तय किया गया था कि ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए सभी देश धरती का तापमान अब दो डिग्री से ज्यादा नहीं बढऩे देंगे, लेकिन यह घोषणा कागजी साबित  होती दिख रही है। यदि इस घोषणा पर अब भी ईमानदारी से अमल नहीं हुआ तो यह तय...
देहरादून। उत्तराखंड के जंगलोंंं में आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार को  पिछले साल की घटनाओं से सबक लेते हुए अभी से जरूरी कदम उठ लेने चाहिए। जंगलों की आग से वन संपदा खाक होने के साथ ही पर्यावरण को भी भारी नुकसान होता है और वन्य जीव भी मारे जाते हैं।  पशु-पक्षी...
नई दिल्ली। हर साल 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस  के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरुकता बढ़ाने का काम किया जाता है लेकिन यह दिन रश्म अदायगी मात्र रह गया है। यदि ऐसा न होता तो आज गंगा-यमुना जैसी नदियां मैदानी क्षेत्रों में गंदा नाला नहीं बनती। भारत की राजधानी...
 (उत्तराखंड के  जंगलों में आग लगने की घटनाए  शुरू हो गई है।   चीड़ के विरोधियों का मानना है कि यह पेड़ अपने आसपास दूसरे पेड़-पौधों को नहीं पनपने देता  है। इसके अलावा इसका पिरुल ही जंगलों में आग लगने की मुख्य कारण है। हालांकि दूसरे वर्ग का मानना है कि चीड़ का पेड़ तो बहुत उपयोगी है। इसे उगाने...
नई दिल्ली। हिमालयी ग्लेशियर ही नहीं बल्कि देशभर के जंगल भी अब संकट में हैं।सरकारी रिपोर्ट भी कहती है की जंगल घाट रहे हैं।   केंद्रीय पर्यायरण व वन मंत्रालय की ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट-२०११’ भी कह चुकी है कि वर्ष २००९ की तुलना में ३६७ वर्ग किमी वन क्षेत्र घटा गया था  जबकि केंद्र सरकार ने ग्रीन इंडिया मिशन...
गरमी का मौसम आ चुका है और अब मैदानों से भारी भीड़ पहाड़ों की ओर जाने लगेगी    । हर साल लगभग पांच करोड़ लोग हिमालयी राज्यों मेंं पर्यटन व धर्माटन के लिए जाती है। अब  हम सभी का कर्तव्य  है कि देश के साथ ही हिमालय के सरोकारों की भी चिंता करें। हिमालय  भीो पर्यावरण मुक्त बनाएं और हिमालयी लोगों...
उत्तराखंड के फलों  में  एक ऐसा फल जिसे सिर्फ सोचकर मुह में पानी आ जाता है वह है हिसर, hisar या हिंसालु  ।यह फल चीड़ के जंगल में पाया जाता है। अक्सर  यह  फल माल मवेशी चराने वाले बच्चे तोड़ कर लाते हैं और फिर सब इसके मीठे  स्वाद का मजा लेते हैं। इसे अंग्रेजी में हिमालयन येलो रसबेरी...
जम्मू, अक्टूबर। चीड़ जिसे जंगल का ऊंट कहा जाता है यह जहां भी जाता है जमीन को बंजर बना देता है।इसमें पाया जाने वाला allelochem जमीन को अम्लीय बना देता है जिसके कारण इसकी जमीन पर कुछ भी उग नही पाता। जब हम वर्किंग प्लान की बात करें तो सभी कोनिफेर्स को कमर्शियल जंगल कहा जाता है। इसमें कोई...
पहाड़ जैसा कठिन जीवन जी रहे हिमालयी लोगों के लिए अब तेंदुआ व गुलदार अब बहुत बड़ी मुसीबत  बनकर सामने आए हैं। यह बात खुद केंद्र सरकार भी मानने लगी है। अकेले उत्तराखंड में ही पिछले एक दशक के दौरान तेंदुआ व गुलदारों ने 560 हमलों में 203 लोगों को मार डाला और खा गये। इसलिए केंद्रीय पर्यावरण व वन...
नई दिल्ली।मोक्षदायिनी गंगा राष्ट्रीय नदी का दर्जा मिल जाने पर भी मैली ही है । इसे निर्मल व अविरल बनाने के लिए बाद में गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण भी बनाया गया, नमामि गंगे योजना भी चल रही है। तब से लगभग आठ  हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा  राज्यों को दे दिये गये, लेकिन आज भी कोई नहीं कह...

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