गरमी का मौसम आ चुका है और अब मैदानों से भारी भीड़ पहाड़ों की ओर जाने लगेगी    । हर साल लगभग पांच करोड़ लोग हिमालयी राज्यों मेंं पर्यटन व धर्माटन के लिए जाती है। अब  हम सभी का कर्तव्य  है कि देश के साथ ही हिमालय के सरोकारों की भी चिंता करें। हिमालय  भीो पर्यावरण मुक्त बनाएं और हिमालयी लोगों...
नई दिल्ली। गोरैया, जिसे उत्तराखंड में घंड्यूड़ी कहा जाता है, आज विलुप्त होती जा रही है। दिल्ली में तो बहुमंजिला इमारतें बन जाने से इसका आशियाना ही छिन गया है। इसलिए यहां कबूतर तो बढ़ रहे हैं, लेकिन गोरैया बहुत कम दिखती है। दिल्ली सरकार ने इस राज्यीय पक्षी घोषित तो किया है, लेकिन इसे बचाने के ज्यादा ठोस प्यास...
नई दिल्ली। हिमालयी ग्लेशियर ही नहीं बल्कि देशभर के जंगल भी अब संकट में हैं।सरकारी रिपोर्ट भी कहती है की जंगल घाट रहे हैं।   केंद्रीय पर्यायरण व वन मंत्रालय की ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट-२०११’ भी कह चुकी है कि वर्ष २००९ की तुलना में ३६७ वर्ग किमी वन क्षेत्र घटा गया था  जबकि केंद्र सरकार ने ग्रीन इंडिया मिशन...
नई दिल्ली।मोक्षदायिनी गंगा राष्ट्रीय नदी का दर्जा मिल जाने पर भी मैली ही है । इसे निर्मल व अविरल बनाने के लिए बाद में गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण भी बनाया गया, नमामि गंगे योजना भी चल रही है। तब से लगभग आठ  हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा  राज्यों को दे दिये गये, लेकिन आज भी कोई नहीं कह...
उत्तराखंड के फलों  में  एक ऐसा फल जिसे सिर्फ सोचकर मुह में पानी आ जाता है वह है हिसर, hisar या हिंसालु  ।यह फल चीड़ के जंगल में पाया जाता है। अक्सर  यह  फल माल मवेशी चराने वाले बच्चे तोड़ कर लाते हैं और फिर सब इसके मीठे  स्वाद का मजा लेते हैं। इसे अंग्रेजी में हिमालयन येलो रसबेरी...
देहरादून। ग्लोबल वार्मिंग के चलते मैदानों की वनस्पतियां अब पहाड़ों की ओर जाने लगी हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में वानस्पतिक विज्ञानियों के अध्ययन के अनुसार तापमान में वृद्धि के कारण मैदानी क्षेत्रों में पनपने वाली अनेक वनस्पतियां अब पहाड़ों की ओर रुख करने लगी हैं। वैज्ञानिक अध्ययन में उत्तराखंड के सोमेश्वर घाटी में साल वृक्षों की बढ़वार में तेजी...
जम्मू, अक्टूबर। चीड़ जिसे जंगल का ऊंट कहा जाता है यह जहां भी जाता है जमीन को बंजर बना देता है।इसमें पाया जाने वाला allelochem जमीन को अम्लीय बना देता है जिसके कारण इसकी जमीन पर कुछ भी उग नही पाता। जब हम वर्किंग प्लान की बात करें तो सभी कोनिफेर्स को कमर्शियल जंगल कहा जाता है। इसमें कोई...
बसंत और फूल एक-दूसरे के पूरक हैं। जहां फूल है, वहां बारहों महीने बसंत है। बसंत है, तो फूल हैं। फूल बसंत ऋतु के द्योतक है। वनों को प्रकृति का श्रृंगार कहा जाता है। वनों के श्रृंगार से आच्छादित प्रकृति बसंत ऋतु में रंग-बिरंगे फूलों के नायाब गहनों से सज-संवर जाती है। फूलों का यह गहना प्रकृति के सौंदर्य...
देहरादून। उत्तराखंड के जंगलोंंं में आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार को  पिछले साल की घटनाओं से सबक लेते हुए अभी से जरूरी कदम उठ लेने चाहिए। जंगलों की आग से वन संपदा खाक होने के साथ ही पर्यावरण को भी भारी नुकसान होता है और वन्य जीव भी मारे जाते हैं।  पशु-पक्षी...
कनाडा में लोग उस वक्त हैरान रह गए जब एक नदी ही गायब हो गई।  बात 2016 की है। कनाडा में महज चार दिन में स्लिम्स नदी लुप्त हो गई। बाद में वैज्ञानिकों ने कहा कि सैकड़ों साल पुरानी यह नदी ‘चोरी’ हो गई है। तब मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग के असर से कनाडा की 150 मीटर चौड़ी...

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