नई दिल्ली।मोक्षदायिनी गंगा राष्ट्रीय नदी का दर्जा मिल जाने पर भी मैली ही है । इसे निर्मल व अविरल बनाने के लिए बाद में गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण भी बनाया गया, नमामि गंगे योजना भी चल रही है। तब से लगभग आठ  हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा  राज्यों को दे दिये गये, लेकिन आज भी कोई नहीं कह...
देहरादून। ग्लोबल वार्मिंग के चलते मैदानों की वनस्पतियां अब पहाड़ों की ओर जाने लगी हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में वानस्पतिक विज्ञानियों के अध्ययन के अनुसार तापमान में वृद्धि के कारण मैदानी क्षेत्रों में पनपने वाली अनेक वनस्पतियां अब पहाड़ों की ओर रुख करने लगी हैं। वैज्ञानिक अध्ययन में उत्तराखंड के सोमेश्वर घाटी में साल वृक्षों की बढ़वार में तेजी...
जम्मू, अक्टूबर। चीड़ जिसे जंगल का ऊंट कहा जाता है यह जहां भी जाता है जमीन को बंजर बना देता है।इसमें पाया जाने वाला allelochem जमीन को अम्लीय बना देता है जिसके कारण इसकी जमीन पर कुछ भी उग नही पाता। जब हम वर्किंग प्लान की बात करें तो सभी कोनिफेर्स को कमर्शियल जंगल कहा जाता है। इसमें कोई...
गरमी का मौसम आ चुका है और अब मैदानों से भारी भीड़ पहाड़ों की ओर जाने लगेगी    । हर साल लगभग पांच करोड़ लोग हिमालयी राज्यों मेंं पर्यटन व धर्माटन के लिए जाती है। अब  हम सभी का कर्तव्य  है कि देश के साथ ही हिमालय के सरोकारों की भी चिंता करें। हिमालय  भीो पर्यावरण मुक्त बनाएं और हिमालयी लोगों...
उत्तराखंड के ॐ पर्वत पर भी ग्रीन हाउस गैसों और ग्लोवल वार्मिंग का असर साफ दिखने लगा है। पिथौरागढ़ स्थित छोटा कैलाश के नाम से पुकारे जाने वाले इस पर्वत पर अब कम बर्फ पड़ने से ॐ की आकृति ठीक से नहीं बन पा रही है। कैलाश को लेकर तो पहले से ही रिपोर्ट आ चुकी है कि ‘शिव...
देहरादून। उत्तराखंड के जंगलोंंं में आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार को  पिछले साल की घटनाओं से सबक लेते हुए अभी से जरूरी कदम उठ लेने चाहिए। जंगलों की आग से वन संपदा खाक होने के साथ ही पर्यावरण को भी भारी नुकसान होता है और वन्य जीव भी मारे जाते हैं।  पशु-पक्षी...
नई दिल्ली। गोरैया, जिसे उत्तराखंड में घंड्यूड़ी कहा जाता है, आज विलुप्त होती जा रही है। दिल्ली में तो बहुमंजिला इमारतें बन जाने से इसका आशियाना ही छिन गया है। इसलिए यहां कबूतर तो बढ़ रहे हैं, लेकिन गोरैया बहुत कम दिखती है। दिल्ली सरकार ने इस राज्यीय पक्षी घोषित तो किया है, लेकिन इसे बचाने के ज्यादा ठोस प्यास...
कनाडा में लोग उस वक्त हैरान रह गए जब एक नदी ही गायब हो गई।  बात 2016 की है। कनाडा में महज चार दिन में स्लिम्स नदी लुप्त हो गई। बाद में वैज्ञानिकों ने कहा कि सैकड़ों साल पुरानी यह नदी ‘चोरी’ हो गई है। तब मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग के असर से कनाडा की 150 मीटर चौड़ी...
पहाड़ जैसा कठिन जीवन जी रहे हिमालयी लोगों के लिए अब तेंदुआ व गुलदार अब बहुत बड़ी मुसीबत  बनकर सामने आए हैं। यह बात खुद केंद्र सरकार भी मानने लगी है। अकेले उत्तराखंड में ही पिछले एक दशक के दौरान तेंदुआ व गुलदारों ने 560 हमलों में 203 लोगों को मार डाला और खा गये। इसलिए केंद्रीय पर्यावरण व वन...
नई दिल्ली। पेरिस के जलवायु सम्मेलन को दो साल हो चुके हैं।   तब तय किया गया था कि ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए सभी देश धरती का तापमान अब दो डिग्री से ज्यादा नहीं बढऩे देंगे, लेकिन यह घोषणा कागजी साबित  होती दिख रही है। यदि इस घोषणा पर अब भी ईमानदारी से अमल नहीं हुआ तो यह तय...

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