नई दिल्ली। हिमालयी ग्लेशियर ही नहीं बल्कि देशभर के जंगल भी अब संकट में हैं।सरकारी रिपोर्ट भी कहती है की जंगल घाट रहे हैं।   केंद्रीय पर्यायरण व वन मंत्रालय की ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट-२०११’ भी कह चुकी है कि वर्ष २००९ की तुलना में ३६७ वर्ग किमी वन क्षेत्र घटा गया था  जबकि केंद्र सरकार ने ग्रीन इंडिया मिशन...
ए मेरे पहाड़ कब तक तू/ अपनों की वापसी के लिए गिड़गिड़ायेगा / बहुत हुआ तू अब न अपने को यूँ तड़पाएगा/ जो गए वो अपने थे / लौट के आएंगे ये अब सपने है/ जो बचा है उसकी परवरिश की सोच/ नयी राहों की कर तलाश / बांस और निंगाल को तराश/ उफनती नदियों व् / धंसती धरती पर लगा अंकुश/ बृक्षों की पाट दे अपार श्रृंखला / पुष्पों...
एक गांव में एक दर्जी रहता था। उसने एक बकरी पाली हुई थी। वह बकरी बातें करती थी। उस दर्जी के तीन बेटे थे। वे दर्जी-पुत्र जब बड़े हुए तो दर्जी ने उन्हें बकरी चराने का काम सौंपा। वह बकरी दिन भर चरती और भर पेट खाती। पर जब दर्जी शाम को उस पर हाथ फेर कर उससे हाल...
बहुत पुरानी बात है। किसी गांव में सात भाई रहते थे। वैसे तो वे बड़े प्यार से मिलकर रहते थे, लेकिन कभी-कभी उनमें झगड़ा हो जाया करता था। छह भाई तो एक ओर हो जाते, एक भाई अकेला पड़ जाता था। जो अकेला पड़ जाता था, वह सबसे छोटा था। वे सब मिलकर उसे बहुत तंग करते थे। एक दिन...
यह प्रेम कथा विश्व की महान प्रेम कथाओं में से एक तो है ही अदभुद भी। गहरी नींद में देखे सपनों में भी प्यार हो सकता है। कहानी पन्द्रहवीं शताब्दी की है। कत्यूर राजवंश के राजकुमार मालूशाही और शौका वंश की कन्या राजुला की प्रेम कथा है। इस कथा के 40 रूप मौजूद हैं। एक बार पंचाचूली पर्वत श्रृंखला के...
यह तेरा हिस्सा है/ कहकर छोटा-सा भू-भाग क्यों देते हो मुझे! / घेरा लगाकर सुंदर बनाने पर भी / यह मुझे कतई पसंद नहीं! / उस घेरे के भीतर / वह घर / उसके अंदर भी कमरे ही कमरे / उन कमरों के अंदर भी अपने-अपने / स्तर और स्थान हैं! / कैसा आश्चर्य! / कैसी चाह / कैसी प्रथा है यहां की ? / तुमुस छोटे से घेरे से घेरे...
ये ऊंचे- ऊंचे पहाड़ / बाट देखते रहे/ बाट देख रहे हैं / बाट देखते रहेंगे / कि मेरे / कभी न कभी / जरूर लौटेंगे. देवेन्द्र जोशी, देहरादून
नई दिल्ली। हर साल 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस  के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरुकता बढ़ाने का काम किया जाता है लेकिन यह दिन रश्म अदायगी मात्र रह गया है। यदि ऐसा न होता तो आज गंगा-यमुना जैसी नदियां मैदानी क्षेत्रों में गंदा नाला नहीं बनती। भारत की राजधानी...
बहुत पुरानी बात है। हिमालय पर्वत की घाटी में एक ऋषि रहते थे। वे गोरे-चिट्टेथे, उनकी  श्वेत धवल दाढ़ी था और कंद, मूल, फल खाते थे । अपना अधिक समय वह तपस्या में व्यतीत करते थे। कभी-कभी बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच अकेले वह उदास हो जाते। उदासी तोड़ने के लिए अक्सर वह जोर से बोलने लगते। उन्हीं...
एक गांव में एक विधवा औरत और उसकी 6-7 साल की बेटी रहते थे। किसी प्रकार गरीबी में वो दोनों अपना गुजर बसर करते थे। एक बार माँ सुबह सवेरे घास के लिए गयी और घास के साथ काफल भी तोड़ के लायी। बेटी ने काफल देखे तो बड़ी खुश हुई। माँ ने कहा कि मैं खेत में काम...

FOLLOW ME

0FansLike
388FollowersFollow
7,763SubscribersSubscribe

WEATHER

- Advertisement -