यह प्रेम कथा विश्व की महान प्रेम कथाओं में से एक तो है ही अदभुद भी। गहरी नींद में देखे सपनों में भी प्यार हो सकता है। कहानी पन्द्रहवीं शताब्दी की है। कत्यूर राजवंश के राजकुमार मालूशाही और शौका वंश की कन्या राजुला की प्रेम कथा है। इस कथा के 40 रूप मौजूद हैं। एक बार पंचाचूली पर्वत श्रृंखला के...
बहुत पुरानी बात है। उत्तराखंड के जंगल में एक विधवा बुढ़िया रहती थी। उसके सात बेटे थे और एक प्यारी-सी बेटी थी । बेटी का नाम था बीरा। कुछ दिनों बाद जब बुढ़िया की मृत्यु हो गई, तो उसके ये बच्चे अनाथ हो गए। सातों भाई शिकार खेलने के शौकीन थे। एक दिन वे सातों भाई मिलकर एक साथ शिकार...
लगातार सात साल से आपके प्यार और स्नेह के चलते आज हिमालयीलोग पोर्टल इस मुकाम पर पहुंच गया है कि उसे देश-दुनिया में बड़ी संख्या में देखा जाता है।  समय भी बदलता है और दुनिया भी और हम भी। इसलिए इस पोर्टल को हम लगातार नये रूप में लाते रहे हैं। पोर्टल को हमने अब चौथी बार रीडिजाइन किया है।...
इतिहास में कर्णावती नाम की दो रानियों का उल्लेख मिलता है ! इनमें एक चित्तौड के शासक राणा संग्राम सिंह की पत्नी थी. जिन्होंने अपने राज्य को गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के हमले से बचाने के लिए मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी थी जबकि दूसरी गढवाल की शासिका थीं ! इतिहास में गढवाल की रानी का उल्लेख...
काफल ! जी हां यह उत्तराखंड समेत पूरे हिमालयी क्षेत्र का प्रसिद्ध फल है। यह हिमालयी  क्षेत्र में पाया जाने वाला मध्यम ऊंचाई वाला पौधा है,  जिसका वैज्ञानिक नाम मैरिका नागी है। यह मैरिटेसि परिवार का पौधा है जो लगभग पूरे भारत में पाया जाता है। उत्तराखंड में इसे काफल के नाम से जाना जाता है। संस्कृत में इसे...
बहुत पुरानी बात है। उत्तराखंड के जंगल में एक विधवा बुढ़िया रहती थी। उसके सात बेटे थे और एक प्यारी-सी बेटी थी । बेटी का नाम था बीरा। कुछ दिनों बाद जब बुढ़िया की मृत्यु हो गई, तो उसके ये बच्चे अनाथ हो गए। सातों भाई शिकार खेलने के शौकीन थे। एक दिन वे सातों भाई मिलकर एक साथ शिकार...
क्या हुआ कि दिल से उतर गया कोई। अश्क़ सा आँखों से निकल गया कोई। उसने जाहिर की शख़्सियत उसकी। और मेरे भीतर से...मर गया कोई। किसी रहबर की जरूरत नहीं रही। ऐसा सबक दे के गुज़र गया कोई। अब भी हर बात पे रूँधता है.. गला। कैसे कह दें कि ग़म से उबर गया कोई। वो ख़ंज़र तो था हिफ़ाज़त के वास्ते। और उसी से ...क़त्ल कर...
नई दिल्ली।  हिंदी पत्रकारिता में भारतेंदु हरिश्चंद्र को पहला पत्रकार माना जाता है लेकिन हिंदी व् कुमाउनी के आदि कवि गुमानी पंत (जन्म 1790-मृत्यु 1846, रचनाकाल 1810 ईसवी से) ने अंग्रेजों के यहां आने से पूर्व ही 1790 से 1815 तक सत्तासीन रहे महा दमनकारी गोरखों के खिलाफ कुमाउनी के साथ ही हिंदी की खड़ी बोली में कलम चलाकर एक...
बहुत पुरानी बात है। एक राजा की सात बेटियां थीं। एक दिन उसने अपनी बेटियों को बुलाया और पूछने लगा, ‘मैं तुम्हें कैसा लगता हूं?’ बड़ी बेटी ने कहा, ‘आप मुझे मीठे लगते हैं।’ दूसरी से पूछा तो उसने भी यही उत्तर दिया। फिर तीसरी, चौथी, पांचवीं और छठी से पूछा। उन्होंने भी यही बात दोहराई। किसी ने गुड़...
बाठ गोडाई क्या तेरो नौं च, बोल बौराणी कख तेरो गौं च? बटोई-जोगी ना पूछ मै कू, केकु पूछदि क्या चैंद त्वै कू? रौतू की बेटी छौं रामि नौ च सेटु की ब्वारी छौं पालि गौं च। मेरा स्वामी न मी छोड़ि घर, निर्दयी ह्वे गैन मेई पर। ज्यूंरा का घर नी जगा मैं कू स्वामी विछोह होयूं च जैं कू। रामी थैं स्वामी की याद ऐगे, हाथ कूटलि छूटण...

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