उत्तराखंड में गढ़वाल हिमालय में केदारनाथ धाम तीन मई को और बद्रीनाथ मंदिर छह मई को श्रद्वालुओं के लिये खुलेंगे।  इससे पहले 28 मई को उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर श्रद्वालुओं के दर्शन के लिये खोल दिये गये जिसके साथ ही वाषिर्क चारधाम यात्रा का भी शुभारंभ...
भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार थे।  वे  वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन अवतरित हुए  थे। उन्हें विष्णु का आवेशावतार भी कहा जाता है क्योंकि इनके क्रोध की कोई सीमा नहीं थी। अपने पिता की हत्या के प्रतिशोध स्वरूप इन्हें हैहय वंशी क्षत्रियों के साथ 21 बार युद्ध करने व उनका समूल नाश करने के लिये जाना जाता...
नई दिल्ली। बैशाखी यानी बिखोती से उत्तराखंड में ग्रीष्मकालीन मेलों की शुरू आत हो गई है। ये मेले मई तक चलेंगे। वैसे तो उत्तराखंड में लगभग हर मौसम में मेले लगते रहे हैं। ठंड के मौसम में प्रसिद्ध गिंदी मेले लगते हैं। हर छह व 12 साल में हरिद्वार में कुंभ लगता है। बरसात में भगवान शिव के मंदिरों में...
( मां वैष्णों देवी के दरबार में अखरोट और सूखा सेब प्रसाद के तौर पर मिलता है। इससे जम्मू-कश्मीर के उत्पाद की बिक्री होती है और स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ती है। लेकिन उत्तराखंड के तीर्थ स्थानों में मैदानी क्षेत्रों से पैक सामान ही प्रसाद के तौर पर मिलता है। क्या उत्तराखंड सरकार को इस दिशा में नहीं सोचना...
देहरादून। उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा शुरू हो गई है। गुरुवार 27 अप्रैल  को गंगा जी की डोली रवना होने के साथ ही यात्रा का शुभारंभ हा गया। अब शुक्रवार को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। इसके बाद केदारनाथ के कपाट तीन मई और बदरीनाथ के कपाट छह मई को खुल जाएंगे। शुक्रवार दोपहर...
ऊँ श्री गणेशाय नम : / प्रथमं वक्रतुण्ड च एकदन्तं द्वितीयकम्, तृतीयं कृष्णपिड्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्।।   / लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च, सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम्।।    / नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्, एकादशं गणपतिं द्वादर्श तु गजाननम्।।    / द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः, न च विध्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं परम्।।   / भगवान श्री गणेश को हिन्दू धर्म में प्रथम पूजनीय...
बढ़ती हुई गर्मी और विविध प्रकार के फल-फूलों से नित नव श्रृंगार करती वसुन्धरा की लहलहाती फसले जब पकने लगती है, तो भारत वर्ष में न केवल कृषक बल्कि आम जन चाहे वह पेशेवार हो या नौकरी करने वाले हो, धरा की इस खूबसूरती को देखकर गद्गद हो जाते है। देश ही नहीं बल्कि विश्व समुदाय भी इसके आकर्षण...
चमोली।  उत्तराखंड के एक देवता ऐसे भी हैं, जिनके दर्शन उनका पुजारी भी नहीं कर पाता। यह मंदिर वर्ष में सिर्फ एक बार बैशाख पूर्णिमा के दिन कुछ घंटे के लिए खुलता है। मंदिर के द्वार खोलते समय पुजारी की आंखों पर पट्टी बंधी होती है। इस मंदिर में किसी वीआइपी की भी नहीं चलती है। वीआइपी की छोड़िए,...
चमोली का सती माता अनूसूया मंदिर गोपेश्वर से 12 किमी दूर गाड़ी से पहुंचा जाता है। इसके बाद अनुसूया गेट से 5 किमी पैदल दूरी तय करने के बाद माता अुनूसूया मंदिर पहुंचा जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालूं यहां पहुंचते हैं हालांकि माता के मंदिर में बारह महीने पूजा के लिए जा सकते हैं, लेकिन पौष माह...
जलते अंगारों के कुंड में क्या कोई मानव चल सकता है? जी हां ऐसे दृश्य देखते हैं तो उत्तराखंड चले आइए। यहां जागरों व देव पूजन के समय यह सब देखा जा सकता है। हाल में भी केदारघाटी यक्षराज (जाख देवता) की पूजा के समय ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। यहां मंदिर परिसर में आग का कुंड बनाया गया...

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