ऊँ श्री गणेशाय नम : / प्रथमं वक्रतुण्ड च एकदन्तं द्वितीयकम्, तृतीयं कृष्णपिड्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्।।   / लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च, सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम्।।    / नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्, एकादशं गणपतिं द्वादर्श तु गजाननम्।।    / द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः, न च विध्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं परम्।।   / भगवान श्री गणेश को हिन्दू धर्म में प्रथम पूजनीय...
भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार थे।  वे  वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन अवतरित हुए  थे। उन्हें विष्णु का आवेशावतार भी कहा जाता है क्योंकि इनके क्रोध की कोई सीमा नहीं थी। अपने पिता की हत्या के प्रतिशोध स्वरूप इन्हें हैहय वंशी क्षत्रियों के साथ 21 बार युद्ध करने व उनका समूल नाश करने के लिये जाना जाता...
चमोली।  उत्तराखंड के एक देवता ऐसे भी हैं, जिनके दर्शन उनका पुजारी भी नहीं कर पाता। यह मंदिर वर्ष में सिर्फ एक बार बैशाख पूर्णिमा के दिन कुछ घंटे के लिए खुलता है। मंदिर के द्वार खोलते समय पुजारी की आंखों पर पट्टी बंधी होती है। इस मंदिर में किसी वीआइपी की भी नहीं चलती है। वीआइपी की छोड़िए,...
  आप सभी को सपरिवार नव वर्ष एवं  नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ या देवी सर्वभूतेषु शक्ति- रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ---------- प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्माचारिणी। तृतीय चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेति चतुर्थकम्। पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रि महागौरीति चाऽष्टम्। नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः। ----------------------------------------- चैत्र नवरात्र: इस बार 9 नहीं 8 दिन के हैं नवरात्र नई दिल्ली: इस बार अमावस्या और नवरात्र एक ही दिन...
नई दिल्ली। उनके द्वार से कोई भी निराश हो कर नहीं जाता है। उत्तराखंड  ही नहीं, देश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग उनके पास मदद की आस लेकर आते हैं और वे उनकी मदद भी करते हैं। जी हां, बात हो रही है भोले महाराज औ माता मंगला जी की। उत्तराखंड मूल के संत दिल्ली में रहते हैं। उनका हंस...
बढ़ती हुई गर्मी और विविध प्रकार के फल-फूलों से नित नव श्रृंगार करती वसुन्धरा की लहलहाती फसले जब पकने लगती है, तो भारत वर्ष में न केवल कृषक बल्कि आम जन चाहे वह पेशेवार हो या नौकरी करने वाले हो, धरा की इस खूबसूरती को देखकर गद्गद हो जाते है। देश ही नहीं बल्कि विश्व समुदाय भी इसके आकर्षण...
लैंसडौन। गढ़वाल रेजीमेंट के मुख्यालय लैंसडौन से लगभग 25 किमी दूर है प्रसिद्ध धाम ताडक़ेश्वर महादेव। देवदार के पेड़ों के बीच है यह धाम। आसपास बांज, बुरांश और चीड़ का घने जंगल है। कोटद्वार- रिखणीखाल मोटर मार्ग पर चखुलियाखाल से लगभग सात किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित ताडक़ेश्वर महादेव मंदिर सदियों से लोगों की आस्था और धार्मिक पर्यटन का केन्द्र...
देहरादून। उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा शुरू हो गई है। गुरुवार 27 अप्रैल  को गंगा जी की डोली रवना होने के साथ ही यात्रा का शुभारंभ हा गया। अब शुक्रवार को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। इसके बाद केदारनाथ के कपाट तीन मई और बदरीनाथ के कपाट छह मई को खुल जाएंगे। शुक्रवार दोपहर...
नई दिल्ली। बैशाखी यानी बिखोती से उत्तराखंड में ग्रीष्मकालीन मेलों की शुरू आत हो गई है। ये मेले मई तक चलेंगे। वैसे तो उत्तराखंड में लगभग हर मौसम में मेले लगते रहे हैं। ठंड के मौसम में प्रसिद्ध गिंदी मेले लगते हैं। हर छह व 12 साल में हरिद्वार में कुंभ लगता है। बरसात में भगवान शिव के मंदिरों में...
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा पर आने वाले बंधुओं आपका स्वागत है। लेकिन उत्तराखंड में आकर आपको हिमालय की चिंता भी करनी चाहिए। हिमालय बचा रहेगा तभी यह यात्रा भी रहेगी। आपको मालूम ही है कि यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा को उत्तराखंड में चार धाम के नाम से भी जाना जाता हैं। यहां सबसे पहले तीर्थयात्री यमुनोत्री (यमुना)...

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