चमोली का सती माता अनूसूया मंदिर गोपेश्वर से 12 किमी दूर गाड़ी से पहुंचा जाता है। इसके बाद अनुसूया गेट से 5 किमी पैदल दूरी तय करने के बाद माता अुनूसूया मंदिर पहुंचा जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालूं यहां पहुंचते हैं हालांकि माता के मंदिर में बारह महीने पूजा के लिए जा सकते हैं, लेकिन पौष माह...
नई दिल्ली। बैशाखी यानी बिखोती से उत्तराखंड में ग्रीष्मकालीन मेलों की शुरू आत हो गई है। ये मेले मई तक चलेंगे। वैसे तो उत्तराखंड में लगभग हर मौसम में मेले लगते रहे हैं। ठंड के मौसम में प्रसिद्ध गिंदी मेले लगते हैं। हर छह व 12 साल में हरिद्वार में कुंभ लगता है। बरसात में भगवान शिव के मंदिरों में...
केदारनाथ मन्दिर भारत के उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। उत्तराखंड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मन्दिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्य ही दर्शन के लिए खुलता है। पत्थरों...
उत्तराखंड में गढ़वाल हिमालय में केदारनाथ धाम तीन मई को और बद्रीनाथ मंदिर छह मई को श्रद्वालुओं के लिये खुलेंगे।  इससे पहले 28 मई को उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर श्रद्वालुओं के दर्शन के लिये खोल दिये गये जिसके साथ ही वाषिर्क चारधाम यात्रा का भी शुभारंभ...
बढ़ती हुई गर्मी और विविध प्रकार के फल-फूलों से नित नव श्रृंगार करती वसुन्धरा की लहलहाती फसले जब पकने लगती है, तो भारत वर्ष में न केवल कृषक बल्कि आम जन चाहे वह पेशेवार हो या नौकरी करने वाले हो, धरा की इस खूबसूरती को देखकर गद्गद हो जाते है। देश ही नहीं बल्कि विश्व समुदाय भी इसके आकर्षण...
जलते अंगारों के कुंड में क्या कोई मानव चल सकता है? जी हां ऐसे दृश्य देखते हैं तो उत्तराखंड चले आइए। यहां जागरों व देव पूजन के समय यह सब देखा जा सकता है। हाल में भी केदारघाटी यक्षराज (जाख देवता) की पूजा के समय ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। यहां मंदिर परिसर में आग का कुंड बनाया गया...
चमोली।  उत्तराखंड के एक देवता ऐसे भी हैं, जिनके दर्शन उनका पुजारी भी नहीं कर पाता। यह मंदिर वर्ष में सिर्फ एक बार बैशाख पूर्णिमा के दिन कुछ घंटे के लिए खुलता है। मंदिर के द्वार खोलते समय पुजारी की आंखों पर पट्टी बंधी होती है। इस मंदिर में किसी वीआइपी की भी नहीं चलती है। वीआइपी की छोड़िए,...
लैंसडौन। गढ़वाल रेजीमेंट के मुख्यालय लैंसडौन से लगभग 25 किमी दूर है प्रसिद्ध धाम ताडक़ेश्वर महादेव। देवदार के पेड़ों के बीच है यह धाम। आसपास बांज, बुरांश और चीड़ का घने जंगल है। कोटद्वार- रिखणीखाल मोटर मार्ग पर चखुलियाखाल से लगभग सात किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित ताडक़ेश्वर महादेव मंदिर सदियों से लोगों की आस्था और धार्मिक पर्यटन का केन्द्र...
भारत को यदि किसी  महामानव ने एकसूत्र में बाँधा तो वे थे आदि शंकराचार्य। आदि शंकराचार्य (Adi Shakaracharya)  अद्वैत वेदान्त के प्रणेता, संस्कृत के विद्वान, उपनिषद व्याख्याता और हिन्दू धर्म प्रचारक थे। हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार इनको भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। इन्होंने लगभग पूरे भारत की यात्रा की और इनके जीवन का अधिकांश भाग उत्तर...
नई दिल्ली। उनके द्वार से कोई भी निराश हो कर नहीं जाता है। उत्तराखंड  ही नहीं, देश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग उनके पास मदद की आस लेकर आते हैं और वे उनकी मदद भी करते हैं। जी हां, बात हो रही है भोले महाराज औ माता मंगला जी की। उत्तराखंड मूल के संत दिल्ली में रहते हैं। उनका हंस...

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