नई दिल्ली। उनके द्वार से कोई भी निराश हो कर नहीं जाता है। उत्तराखंड  ही नहीं, देश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग उनके पास मदद की आस लेकर आते हैं और वे उनकी मदद भी करते हैं। जी हां, बात हो रही है भोले महाराज औ माता मंगला जी की। उत्तराखंड मूल के संत दिल्ली में रहते हैं। उनका हंस...
लैंसडौन। गढ़वाल रेजीमेंट के मुख्यालय लैंसडौन से लगभग 25 किमी दूर है प्रसिद्ध धाम ताडक़ेश्वर महादेव। देवदार के पेड़ों के बीच है यह धाम। आसपास बांज, बुरांश और चीड़ का घने जंगल है। कोटद्वार- रिखणीखाल मोटर मार्ग पर चखुलियाखाल से लगभग सात किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित ताडक़ेश्वर महादेव मंदिर सदियों से लोगों की आस्था और धार्मिक पर्यटन का केन्द्र...
केदारनाथ मन्दिर भारत के उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। उत्तराखंड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मन्दिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्य ही दर्शन के लिए खुलता है। पत्थरों...
देहरादून। उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा शुरू हो गई है। गुरुवार 27 अप्रैल  को गंगा जी की डोली रवना होने के साथ ही यात्रा का शुभारंभ हा गया। अब शुक्रवार को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। इसके बाद केदारनाथ के कपाट तीन मई और बदरीनाथ के कपाट छह मई को खुल जाएंगे। शुक्रवार दोपहर...
भारत को यदि किसी  महामानव ने एकसूत्र में बाँधा तो वे थे आदि शंकराचार्य। आदि शंकराचार्य (Adi Shakaracharya)  अद्वैत वेदान्त के प्रणेता, संस्कृत के विद्वान, उपनिषद व्याख्याता और हिन्दू धर्म प्रचारक थे। हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार इनको भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। इन्होंने लगभग पूरे भारत की यात्रा की और इनके जीवन का अधिकांश भाग उत्तर...
चमोली का सती माता अनूसूया मंदिर गोपेश्वर से 12 किमी दूर गाड़ी से पहुंचा जाता है। इसके बाद अनुसूया गेट से 5 किमी पैदल दूरी तय करने के बाद माता अुनूसूया मंदिर पहुंचा जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालूं यहां पहुंचते हैं हालांकि माता के मंदिर में बारह महीने पूजा के लिए जा सकते हैं, लेकिन पौष माह...
ऊँ श्री गणेशाय नम : / प्रथमं वक्रतुण्ड च एकदन्तं द्वितीयकम्, तृतीयं कृष्णपिड्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्।।   / लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च, सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम्।।    / नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्, एकादशं गणपतिं द्वादर्श तु गजाननम्।।    / द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः, न च विध्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं परम्।।   / भगवान श्री गणेश को हिन्दू धर्म में प्रथम पूजनीय...
भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार थे।  वे  वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन अवतरित हुए  थे। उन्हें विष्णु का आवेशावतार भी कहा जाता है क्योंकि इनके क्रोध की कोई सीमा नहीं थी। अपने पिता की हत्या के प्रतिशोध स्वरूप इन्हें हैहय वंशी क्षत्रियों के साथ 21 बार युद्ध करने व उनका समूल नाश करने के लिये जाना जाता...
( मां वैष्णों देवी के दरबार में अखरोट और सूखा सेब प्रसाद के तौर पर मिलता है। इससे जम्मू-कश्मीर के उत्पाद की बिक्री होती है और स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ती है। लेकिन उत्तराखंड के तीर्थ स्थानों में मैदानी क्षेत्रों से पैक सामान ही प्रसाद के तौर पर मिलता है। क्या उत्तराखंड सरकार को इस दिशा में नहीं सोचना...
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा पर आने वाले बंधुओं आपका स्वागत है। लेकिन उत्तराखंड में आकर आपको हिमालय की चिंता भी करनी चाहिए। हिमालय बचा रहेगा तभी यह यात्रा भी रहेगी। आपको मालूम ही है कि यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा को उत्तराखंड में चार धाम के नाम से भी जाना जाता हैं। यहां सबसे पहले तीर्थयात्री यमुनोत्री (यमुना)...

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