भारत को यदि किसी  महामानव ने एकसूत्र में बाँधा तो वे थे आदि शंकराचार्य। आदि शंकराचार्य (Adi Shakaracharya)  अद्वैत वेदान्त के प्रणेता, संस्कृत के विद्वान, उपनिषद व्याख्याता और हिन्दू धर्म प्रचारक थे। हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार इनको भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। इन्होंने लगभग पूरे भारत की यात्रा की और इनके जीवन का अधिकांश भाग उत्तर...
भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार थे।  वे  वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन अवतरित हुए  थे। उन्हें विष्णु का आवेशावतार भी कहा जाता है क्योंकि इनके क्रोध की कोई सीमा नहीं थी। अपने पिता की हत्या के प्रतिशोध स्वरूप इन्हें हैहय वंशी क्षत्रियों के साथ 21 बार युद्ध करने व उनका समूल नाश करने के लिये जाना जाता...
बढ़ती हुई गर्मी और विविध प्रकार के फल-फूलों से नित नव श्रृंगार करती वसुन्धरा की लहलहाती फसले जब पकने लगती है, तो भारत वर्ष में न केवल कृषक बल्कि आम जन चाहे वह पेशेवार हो या नौकरी करने वाले हो, धरा की इस खूबसूरती को देखकर गद्गद हो जाते है। देश ही नहीं बल्कि विश्व समुदाय भी इसके आकर्षण...
चमोली का सती माता अनूसूया मंदिर गोपेश्वर से 12 किमी दूर गाड़ी से पहुंचा जाता है। इसके बाद अनुसूया गेट से 5 किमी पैदल दूरी तय करने के बाद माता अुनूसूया मंदिर पहुंचा जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालूं यहां पहुंचते हैं हालांकि माता के मंदिर में बारह महीने पूजा के लिए जा सकते हैं, लेकिन पौष माह...
( मां वैष्णों देवी के दरबार में अखरोट और सूखा सेब प्रसाद के तौर पर मिलता है। इससे जम्मू-कश्मीर के उत्पाद की बिक्री होती है और स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ती है। लेकिन उत्तराखंड के तीर्थ स्थानों में मैदानी क्षेत्रों से पैक सामान ही प्रसाद के तौर पर मिलता है। क्या उत्तराखंड सरकार को इस दिशा में नहीं सोचना...
जलते अंगारों के कुंड में क्या कोई मानव चल सकता है? जी हां ऐसे दृश्य देखते हैं तो उत्तराखंड चले आइए। यहां जागरों व देव पूजन के समय यह सब देखा जा सकता है। हाल में भी केदारघाटी यक्षराज (जाख देवता) की पूजा के समय ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। यहां मंदिर परिसर में आग का कुंड बनाया गया...
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा पर आने वाले बंधुओं आपका स्वागत है। लेकिन उत्तराखंड में आकर आपको हिमालय की चिंता भी करनी चाहिए। हिमालय बचा रहेगा तभी यह यात्रा भी रहेगी। आपको मालूम ही है कि यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा को उत्तराखंड में चार धाम के नाम से भी जाना जाता हैं। यहां सबसे पहले तीर्थयात्री यमुनोत्री (यमुना)...
नई दिल्ली। बैशाखी यानी बिखोती से उत्तराखंड में ग्रीष्मकालीन मेलों की शुरू आत हो गई है। ये मेले मई तक चलेंगे। वैसे तो उत्तराखंड में लगभग हर मौसम में मेले लगते रहे हैं। ठंड के मौसम में प्रसिद्ध गिंदी मेले लगते हैं। हर छह व 12 साल में हरिद्वार में कुंभ लगता है। बरसात में भगवान शिव के मंदिरों में...
  आप सभी को सपरिवार नव वर्ष एवं  नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ या देवी सर्वभूतेषु शक्ति- रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ---------- प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्माचारिणी। तृतीय चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेति चतुर्थकम्। पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रि महागौरीति चाऽष्टम्। नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः। ----------------------------------------- चैत्र नवरात्र: इस बार 9 नहीं 8 दिन के हैं नवरात्र नई दिल्ली: इस बार अमावस्या और नवरात्र एक ही दिन...
लैंसडौन। गढ़वाल रेजीमेंट के मुख्यालय लैंसडौन से लगभग 25 किमी दूर है प्रसिद्ध धाम ताडक़ेश्वर महादेव। देवदार के पेड़ों के बीच है यह धाम। आसपास बांज, बुरांश और चीड़ का घने जंगल है। कोटद्वार- रिखणीखाल मोटर मार्ग पर चखुलियाखाल से लगभग सात किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित ताडक़ेश्वर महादेव मंदिर सदियों से लोगों की आस्था और धार्मिक पर्यटन का केन्द्र...

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