हमारे घर पर उन दिनों हिंदी का अखबार जनसत्ता भी आता था। बात 1992 की है। जनसत्ता के जमनापर पेज में हरीश लखेड़ा की खबरें पढऩे को मिलने लगीं। लखेड़ा नाम से यह तो जान लिया था कि ये पत्रकार उत्तराखंड मूल के ही हैं और उनकी खबरों से यह भी अहसास हो गया था कि वे उत्तराखंडियों के...
पहाड़ जितने ऊंचे होते हैं उतने ही गहरे भी। यहां का आदमी जीवन में जितना ऊंचा उठता है उसके विचारों में उतनी ही गहराई आ जाती है। अपने अजीज दोस्त हरीश लखेड़ा के कविता संग्रह ‘दिल्ली का रास्ता’ पढऩे के बाद मैंने बखूबी महसूस किया कि पत्रकारिता और लेखन में आगे बढऩे के साथ ही उनके विचारों में गहराई...
पृथक राज्य के लिए उत्तराखंड में धधक रही संघर्ष ज्वाला को ऊर्जा प्रदान करने हेतु 80 के दशक व उसके उपरान्त देश की राजधानी दिल्ली के बोट क्लब और जंतर-मंतर व विभिन्न क्षेत्रों में उत्तराखंड राज्य हेतु जनजाागरण व आंदोलनों के कार्यक्रमों की श्रंृखलाएं आयोजित होती थीं। दिल्ली में लगातार होते आंदोलनों के कार्यक्रमों के दौरान उत्तराखंड मूल के...
यूं तो टीवी एवं प्रिंट मीडिया में उत्तराखंड के सैकड़ों प्रतिभावान लोग कार्यरत हैं उनमें हरीश लखेडा पत्रकारिता के क्षेत्र के एक जाना पहचाना नाम है विशेषकर उत्तराखंडियों में उनको सम्मान की दृष्टि से देखा जाता हैं। 1994 से पहले मैं उन्हें नहीं पहचानता था। 7 मई 1994 को उनसे पहली मुलाकात अचानक घटे एक घटनाक्रम में हुई थी।...
नई दिल्ली। उत्तराखंड आंदोलन के सभी आयामों को छूने वाली यह पहली किताब है। यह समग्रता में लिखी गई है उत्तराखंड आंदोलन: स्मृतियों का हिमालय। इसमें विभिन्न समाचारों में  प्रकाशित उस दौर के समाचार और लेखों को लिया गया है। इसक साथ ही उस दौर की घटनाओं को भी लिया गया है। वास्तव में उत्तराखंड आंदोलन को लिखने को लेकर...
नई दिल्ली।  सुप्रसिद्ध उत्तराखण्ड आंदोलनकारी एवं सल्ट ब्लॉक की पूर्व प्रमुख  कमला रावत (कमला दीदी ) अब हमारे बीच  नहीं रही ।  हिमालयीलोग की उनको भावभीनी श्रद्धांजलि। उत्तराखंड  आंदोलन की अग्रणी आंदोलनकारी व समर्पित समाजसेवी कमला रावत का 20 मई की मध्य रात्रि को निधन होने से उनके परिजन सहित उत्तराखण्ड व दिल्ली के उत्तराखण्डी समाज में शोक छा गया।...
नई दिल्ली। उत्तराखंड में सरकार किसी भी दल की रही हो लेकिन किसी ने भी अपने समाज के दिल्ली समेत प्रवास में रह रहे बुद्धिजीवियों विशेषतौर पर पत्रकारों की कभी सुध नहीं ली। जबकि उत्तराखंड राज्य निर्माण में दिल्ली के पत्रकारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रदेश में अब तक कांग्रेस व भाजपा बारी-बारी से राज करती रही हैं।...
नई दिल्ली। बैशाखी यानी बिखोती से उत्तराखंड में ग्रीष्मकालीन मेलों की शुरू आत हो गई है। ये मेले मई तक चलेंगे। वैसे तो उत्तराखंड में लगभग हर मौसम में मेले लगते रहे हैं। ठंड के मौसम में प्रसिद्ध गिंदी मेले लगते हैं। हर छह व 12 साल में हरिद्वार में कुंभ लगता है। बरसात में भगवान शिव के मंदिरों में...
नदी की तरह बहता रहा, समुद्र में जाकर ही मिलना है व खारा होना है --वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र धस्माना महात्मा गांधी या गांधीवाद, हिमालय या रेगिस्तान, वामपंथ हो या पूंजीवाद यानी भी कोई विषय, राजेन्द्र धस्माना इस तमाम विषयों का चलता-फिरता इन्साइक्लोपीडिया हैं। किसी भी मुद्दे पर नये विचार रख सकते हैं। दूरदर्शन में समाचार संपादक रहने के बाद सम्पूर्ण गांधी...
दिल्ली की लगभग एक चौथाई आबादी उत्तराखंड प्रवासियों की है। वैसे तो दिल्ली के हर इलाके में उत्तराखंड के लोग मिल जाएंगे लेकिन दक्षिण और पूर्वी जिला में इनका घनत्व कुछ ज्यादा ही है। जाड़ों में यह संख्या और भी बढ़ जाती है। ठंड ज्यादा बढ़ने और खेती के काम से फुरसत मिलने के कारण पहाड़ के लोग मैदानी...

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