नई दिल्ली। 11 अगस्त, 2017। ‘उत्तराखंड आन्दोलन-स्मृतियों का हिमालय’ पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार हरीश लखेड़ा ने कहा कि इस पुस्तक में आंदोलन में दिल्ली वालों की भूमिका का विस्तार से जिक्र है। जबकि उत्तराखंड के लोग दिल्ली वालों को ‘ठ्यकर्या’ कहते रहे हैं। ‘ठ्यकर्या’ शब्द सुनते ही मुख्यमंत्री रावत चौक गए। उन्होंने कहा कि वे यह शब्द पहली बार...
-----  व्योमेश चन्द्र जुगरान ( हिमालयीलोग दिल्ली में उत्तराखंड के पुराने पत्रकारों को याद कर रहा है।  वीरेन्द्र बर्त्वाल पहली पीढ़ी के पत्रकारोंमें से एक थे ।  22 जुलाई को उनकी  नौवीं पुण्यतिथि थीं।) ---------------------------------------------- नई दिल्ली। परम आदरणीय वीरेन्द्र बर्त्वालजी तब नवभारत टाइम्स दिल्ली मे न्यूज एडिटर थे। मैं नभाटा के जयपुर संस्करण में था। जब भी दिल्ली आना होता, बर्त्वाल जी...
------------  इंद्र  वशिष्ठ .------------------------ दिल्ली और एनसीआर में  पिछले 5-7 सालों में  हत्या, लूट और जबरन वसूली  जैसे  संगीन अपराध  में देसी पिस्तौल के इस्तेमाल में जबरदस्त इजाफा हुआ है । उम्दा किस्म के देसी पिस्तौल का आसानी से मिल जाना इसका मुख्य कारण है।  15 मई 2017 तक  ही दिल्ली पुलिस 371  पिस्तौल/रिवाल्वर/बंदूक बरामद कर चुकी है। पुलिस ने...
हरीश लखेड़ा दिल्ली में मुख्यधारा के पत्रकार रहे हैं। वे उन चंद साथियों में हैं जिन्होंने उत्तराखंड की अपनी माटी से जुड़े सवालों को भी समानांतर ढंग से मुख्यधारा का अंग बनाया और आंचलिक मुद्दों को राष्ट्रीय पटल पर पूरी गंभीरता से उठाया। वैसे भी तब दिल्ली के बड़े अखबारों में आंचलिक आग्रहों के लिए बहुत सीमित जगह हुआ...
हमारे घर पर उन दिनों हिंदी का अखबार जनसत्ता भी आता था। बात 1992 की है। जनसत्ता के जमनापर पेज में हरीश लखेड़ा की खबरें पढऩे को मिलने लगीं। लखेड़ा नाम से यह तो जान लिया था कि ये पत्रकार उत्तराखंड मूल के ही हैं और उनकी खबरों से यह भी अहसास हो गया था कि वे उत्तराखंडियों के...
पहाड़ जितने ऊंचे होते हैं उतने ही गहरे भी। यहां का आदमी जीवन में जितना ऊंचा उठता है उसके विचारों में उतनी ही गहराई आ जाती है। अपने अजीज दोस्त हरीश लखेड़ा के कविता संग्रह ‘दिल्ली का रास्ता’ पढऩे के बाद मैंने बखूबी महसूस किया कि पत्रकारिता और लेखन में आगे बढऩे के साथ ही उनके विचारों में गहराई...
पृथक राज्य के लिए उत्तराखंड में धधक रही संघर्ष ज्वाला को ऊर्जा प्रदान करने हेतु 80 के दशक व उसके उपरान्त देश की राजधानी दिल्ली के बोट क्लब और जंतर-मंतर व विभिन्न क्षेत्रों में उत्तराखंड राज्य हेतु जनजाागरण व आंदोलनों के कार्यक्रमों की श्रंृखलाएं आयोजित होती थीं। दिल्ली में लगातार होते आंदोलनों के कार्यक्रमों के दौरान उत्तराखंड मूल के...
यूं तो टीवी एवं प्रिंट मीडिया में उत्तराखंड के सैकड़ों प्रतिभावान लोग कार्यरत हैं उनमें हरीश लखेडा पत्रकारिता के क्षेत्र के एक जाना पहचाना नाम है विशेषकर उत्तराखंडियों में उनको सम्मान की दृष्टि से देखा जाता हैं। 1994 से पहले मैं उन्हें नहीं पहचानता था। 7 मई 1994 को उनसे पहली मुलाकात अचानक घटे एक घटनाक्रम में हुई थी।...
नई दिल्ली। उत्तराखंड पत्रकार परिषद के महासचिव अवतार नेगी का मानना है कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इसलिए असफल रहे क्योंकि उनमें पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव के सभी गुण आ गए थे। नरसिंह राव ने कभी भी किसी का काम नहीं किया। वे विवादों को भी टालते रहे क्योंकि उनका मानना था कि काम मत करो...
नई दिल्ली। उत्तराखंड आंदोलन के सभी आयामों को छूने वाली यह पहली किताब है। यह समग्रता में लिखी गई है उत्तराखंड आंदोलन: स्मृतियों का हिमालय। इसमें विभिन्न समाचारों में  प्रकाशित उस दौर के समाचार और लेखों को लिया गया है। इसक साथ ही उस दौर की घटनाओं को भी लिया गया है। वास्तव में उत्तराखंड आंदोलन को लिखने को लेकर...

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