हल्द्वानी के एक युवक की हत्या गुरुग्राम में कर दी गई। जानकारी के मुताबिक, बिन्दुखत्ता का रहने वाला रमेश सिंह बिष्ट गुरुग्राम में रहकर होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा था। बताया जा रहा है कि गुरुवार सुबह युवक के कमरे में पानी नहीं आ रहा था जिसकी शिकायत उसने अपने मकान मालिक से की। इस दौरान दोनों में...
------------  इंद्र  वशिष्ठ .------------------------ दिल्ली और एनसीआर में  पिछले 5-7 सालों में  हत्या, लूट और जबरन वसूली  जैसे  संगीन अपराध  में देसी पिस्तौल के इस्तेमाल में जबरदस्त इजाफा हुआ है । उम्दा किस्म के देसी पिस्तौल का आसानी से मिल जाना इसका मुख्य कारण है।  15 मई 2017 तक  ही दिल्ली पुलिस 371  पिस्तौल/रिवाल्वर/बंदूक बरामद कर चुकी है। पुलिस ने...
हरीश लखेड़ा दिल्ली में मुख्यधारा के पत्रकार रहे हैं। वे उन चंद साथियों में हैं जिन्होंने उत्तराखंड की अपनी माटी से जुड़े सवालों को भी समानांतर ढंग से मुख्यधारा का अंग बनाया और आंचलिक मुद्दों को राष्ट्रीय पटल पर पूरी गंभीरता से उठाया। वैसे भी तब दिल्ली के बड़े अखबारों में आंचलिक आग्रहों के लिए बहुत सीमित जगह हुआ...
हमारे घर पर उन दिनों हिंदी का अखबार जनसत्ता भी आता था। बात 1992 की है। जनसत्ता के जमनापर पेज में हरीश लखेड़ा की खबरें पढऩे को मिलने लगीं। लखेड़ा नाम से यह तो जान लिया था कि ये पत्रकार उत्तराखंड मूल के ही हैं और उनकी खबरों से यह भी अहसास हो गया था कि वे उत्तराखंडियों के...
पहाड़ जितने ऊंचे होते हैं उतने ही गहरे भी। यहां का आदमी जीवन में जितना ऊंचा उठता है उसके विचारों में उतनी ही गहराई आ जाती है। अपने अजीज दोस्त हरीश लखेड़ा के कविता संग्रह ‘दिल्ली का रास्ता’ पढऩे के बाद मैंने बखूबी महसूस किया कि पत्रकारिता और लेखन में आगे बढऩे के साथ ही उनके विचारों में गहराई...
पृथक राज्य के लिए उत्तराखंड में धधक रही संघर्ष ज्वाला को ऊर्जा प्रदान करने हेतु 80 के दशक व उसके उपरान्त देश की राजधानी दिल्ली के बोट क्लब और जंतर-मंतर व विभिन्न क्षेत्रों में उत्तराखंड राज्य हेतु जनजाागरण व आंदोलनों के कार्यक्रमों की श्रंृखलाएं आयोजित होती थीं। दिल्ली में लगातार होते आंदोलनों के कार्यक्रमों के दौरान उत्तराखंड मूल के...
यूं तो टीवी एवं प्रिंट मीडिया में उत्तराखंड के सैकड़ों प्रतिभावान लोग कार्यरत हैं उनमें हरीश लखेडा पत्रकारिता के क्षेत्र के एक जाना पहचाना नाम है विशेषकर उत्तराखंडियों में उनको सम्मान की दृष्टि से देखा जाता हैं। 1994 से पहले मैं उन्हें नहीं पहचानता था। 7 मई 1994 को उनसे पहली मुलाकात अचानक घटे एक घटनाक्रम में हुई थी।...
नई दिल्ली। उत्तराखंड पत्रकार परिषद के महासचिव अवतार नेगी का मानना है कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इसलिए असफल रहे क्योंकि उनमें पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव के सभी गुण आ गए थे। नरसिंह राव ने कभी भी किसी का काम नहीं किया। वे विवादों को भी टालते रहे क्योंकि उनका मानना था कि काम मत करो...
नई दिल्ली। उत्तराखंड आंदोलन के सभी आयामों को छूने वाली यह पहली किताब है। यह समग्रता में लिखी गई है उत्तराखंड आंदोलन: स्मृतियों का हिमालय। इसमें विभिन्न समाचारों में  प्रकाशित उस दौर के समाचार और लेखों को लिया गया है। इसक साथ ही उस दौर की घटनाओं को भी लिया गया है। वास्तव में उत्तराखंड आंदोलन को लिखने को लेकर...
नई दिल्ली।  सुप्रसिद्ध उत्तराखण्ड आंदोलनकारी एवं सल्ट ब्लॉक की पूर्व प्रमुख  कमला रावत (कमला दीदी ) अब हमारे बीच  नहीं रही ।  हिमालयीलोग की उनको भावभीनी श्रद्धांजलि। उत्तराखंड  आंदोलन की अग्रणी आंदोलनकारी व समर्पित समाजसेवी कमला रावत का 20 मई की मध्य रात्रि को निधन होने से उनके परिजन सहित उत्तराखण्ड व दिल्ली के उत्तराखण्डी समाज में शोक छा गया।...

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