हिमालयी सरोकारों पर हर वर्ष होगी राजेंद्र धस्माना व्याख्यानमाला

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हिमालयीलोग ट्रस्ट का कार्यक्रम : राजेंद्र धस्माना व्याख्यानमाला -1
नयी दिल्ली। हिमालयीलोग ट्रस्ट गांधीवादी पत्रकार राजेंद्र धस्माना की स्मृति में प्रतिवर्ष ‘राजेंद्र धस्माना व्याख्यानमाला’ का आयोजन करेगा। इस साल का पहला राजेंद्र धस्माना व्याख्यान शनिवार, 21 सितंबर 2019 को यहां उत्तराखंड सदन में आयोजित किया गया।
व्याख्यानमाला में इस बार दो विषय थे।
1- हिमालय की विलुप्त होती टांकणी लिपि- श्री रमेश जोशी( आईआईएस, अतिरिक्त महानिदेशक, पीआईबी, भारत सरकार)
2- गंगा को क्या दे रहे हैं मैदान के लोग- श्री अनंत मित्तल ( वरिष्ठ पत्रकार)
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हिमालय की विलुप्त होती टांकणी लिपि- (व्याख्यान का सार)
यह लिपि कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नेपाल, और भूटान तक में प्रचलन में थीं। इसे टाकरी या टांकड़ी भी कहा जाता है। हिमालयी क्षेत्रों में आज भी कई इलाकों में ब्राह्मण अपने तंत्र-मंत्र को इसी भाषा में लिखते हैं। माना जाता है कि यह भाषा आर्यों से पहले भारत में आए खसों की थी। हिमाचल प्रदेश के चंबा रियासत की यह राजभाषा भी रही है। अब इस भाषा को दोबारा जिंदा करने के प्रयास किए जाएंगे।
— श्री रमेश जोशी(आईआईएस, अतिरिक्त महानिदेशक, पीआईबी, भारत सरकार)
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2- गंगा को क्या दे रहे हैं मैदान के लोग- (व्याख्यान का सार)
उत्तराखंड के लोग ऋषिकेश में गंगा को शद्ध व निर्मल तौर पर देश वासियों को सौंपते हैं। लेकिन ये मैदानी लोग गंगा को मल-मूत्र से भर दे रहे हैं। वे गंगा-यमुना समेत अन्य नदियों को क्या देते हैं। हर साल कांवड़ के लिए करोड़ों लोग हरिद्वार से लेकर गंगोत्री, गोमुख तक जाते हैं। अब कुंभ में करोड़ां लोग हरिद्वार आएंगे। यदि इन लोगों को आगे भी आचमन के लिए शुद्ध गंगाजल चाहिए तो उनसे कम से कम 10 रुपये टैक्स के तौर पर लिया जाना चाहिए। यह पैसा उत्तराखंड को दिया जाना चाहिए। ताकि गंगा को शुद्ध व निर्मल बनाए रखने में मदद मिले।
–श्री अनंत मित्तल ( वरिष्ठ पत्रकार)
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श्री भूपेंद्र कैंथोला (भारतीय फिल्म व टेलीविजन संस्थान, पुणे के निदेशक)
-श्री कैंथोला ने कहा कि उत्तराखंड के युवकों में नाटक और कला को लेकर बहुत टैलेंट है, लेकिन वे भारतीय फिल्म व टेलीविजन संस्थान, पुणे तक पहुंच नही पा रहे हैं। इसके लिए प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि ुनकी कोशिश है कि इस संस्थान की एक शाखा उत्तराखंड में भी खुल जाए।
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डा. हरीश लखेड़ा ( कार्यक्रम के संयोजक)
–हिमालयीलोग ट्रस्ट की ओर से यह ‘हिमालय को जानिए’ कार्यक्रम था। कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार डा. हरीश लखेड़ा के अनुसार इसके तहत वरिष्ठ पत्रकार स्व. राजेंद्र धस्माना की स्मृति में ‘राजेंद्र धस्माना व्याख्यानमाला’ शुरू की गई है। अब इस व्याख्यान माला के तहत गंभीर मुद्दों का उठाया जाएगा। व्याख्यानमाला हर साल होगी।
इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के शिक्षामंत्री श्री धन सिंह रावत ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय फिल्म व टेलीविजन संस्थान, पुणे के निदेशक श्री भूपेंद्र कैंथोला थे। कार्यक्रम के विशेष अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री अनंत मित्तल और समाजसेवी श्री मदन गोपाल लखेड़ा थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिवंगत धस्माना जी की बहन प्रो. उनिता सचिदानंद ने की। इस अवसर पर धस्माना जी की पत्नी श्रीमती बसंती धस्माना, बेटी परिधि नेगी सहित कई परिजन भी मौजूद थे। इस मौके पर धस्माना जी के जीवनवृत को याद किया गया। पर्वतीय न्यूज इस कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर और उत्तराखंड के लखेड़ाओं का ट्रस्ट ‘श्री भानुवीर नारद फाउंडेशन’ सहयोगी थे। कार्यक्रम उत्तराखंड सदन, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में हुआ।

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