जेल में डालो इस मूर्ख औरत महबूबा मुफ्ती को — हिमालयीलोग पोर्टल की मांग

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नई दिल्ली। हिमालयीलोग पोर्टल ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से जम्मू -कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती जेल में डालने की मांग की है।  10 गढ़वाल राइफल के सैनिकों के खिलाफ मुक़दमा दर्ज कराने वाली  मूर्ख औरत मुख्यमंत्री लायक नहीं है।

वैसे यह अच्छी है कि  जम्मू-कश्मीर के शोपियां में सेना की गोली से 2 युवकों के मारे जाने के बाद भले ही एफआईआर दर्ज हो गई हो, लेकिन सेना का मानना है कि वहां सैनिकों ने कुछ गलत नहीं किया है। कश्मीर में सेना को यह विशेषाधिकार है कि वह आत्मरक्षा में गोली चलाए। सेना के बड़े अधिकारियों ने इस मामले में मेजर लीतुल गोगोई की तरह एफआईआर के घेरे में आए सैनिकों का साथ देने का फैसला किया है। शोपियां जिले में शनिवार को सेना की गोलीबारी में 2 युवकों की मौत के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली थी, जिसमें आर्मी के मेजर की अगुवाई वाले 10 गढ़वाल राइफल के सैनिकों को आरोपी बनाया गया है। सेना के सूत्रों का कहना है कि मेजर लीतुल गोगोई के मामले की तरह इस मामले में भी सेना बतौर संगठन अपने सैनिकों के साथ खड़ी रहेगी।
गौरतलब है कि घाटी में पत्थरबाजी से बचने के लिए स्थानीय युवक को जीप से बांधे जाने के लिए जिस मेजर लीतुल गोगोई को जिम्मेदार समझा गया था, उन्हें आर्मी चीफ ने कमेंडेशन (प्रशस्ति) कार्ड दिया था। सूत्रों का कहना है कि मेजर गोगोई के मामले में विवाद के जरिए सवाल उठाने की कोशिश की गई थी, लेकिन ताजा मामले में किसी तरह का कोई संदेह नहीं है। शोपियां में किसी भी मानक प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि शनिवार को 10 गढ़वाल राइफल्स का 40-50 सैनिकों का काफिला मूवमेंट के लिए बालपुरा से अन्य ठिकाने के लिए निकला था। रास्ते में केलर में पत्थरबाजी चल रही थी, सो काफिले ने गनापुरा का दूसरा रूट ले लिया। गनापुरा में कट्टरपंथियों का बड़ा जमावड़ा है। वहां हाल में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी फिरदौस के मारे जाने के बाद से तनाव था। स्थानीय लोगों को जैसे ही सेना के काफिले के मूवमेंट का पता चला तो करीब 100 लोग पत्थरबाजी के लिए जुट गए। इस बीच सेना के काफिले की 4 गाड़ियां एक मोड़ पर टर्न लेने की जगह 100 मीटर आगे बढ़ गईं, जहां से वापसी के दौरान रफ्तार धीमी होने से चारों गाड़ियां घिर गईं। सेना के जेसीओ ने भीड़ को समझाने की कोशिश की, लेकिन पत्थरबाजी जारी रही। इस बीच एक पत्थर लगने से जेसीओ बेहोश होकर गिर गया। इसके बाद 3 से चार हवाई फायरिंग कर पत्थरबाजी कर रहे लोगों को चेतावनी दी गई। भीड़ और सैनिकों के बीच फासला जब महज 10 मीटर का रह गया, तब एक सैनिक ने फायरिंग की। सूत्रों का कहना है कि यह अचानक हालात देखकर लिया गया फैसला था, जिसमें मेजर की कोई भूमिका नहीं थी।  घाटी के ऑपरेशनों में सेना के श्रीनगर स्थित 15 कोर का अहम रोल है, जिसके प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल जे.एस. संधू ने एक इंटरव्यू में कहा है कि शोपियां में आर्मी को गंभीर तरीके से मजबूर किया गया। आर्मी नागरिकों पर गोली नहीं चलाना चाहती, लेकिन उसने आत्मरक्षा में यह काम किया। इससे पहले हवाई फायरिंग के जरिए चेतावनी भी दी गई थी। पुलिस की एफआईआर पर सूत्रों का कहना है कि यह महज जांच प्रक्रिया की शुरुआत है, जिसमें सबूतों को इकट्ठा किया जाएगा। माना जा रहा है कि अब जिला कलेक्टर, पुलिस अधिकारी, न्यायिक अधिकारी मिलकर सभी पक्षों की बात सुनेंगे। पीड़ितों, पुलिस और डॉक्टर के साथ सेना का पक्ष भी सुना जाएगा। सेना इसमें सिविल प्रशासन से सहयोग करने और जरूरी मदद देने के लिए तैयार है।
इस मसले पर राज्य में सत्ताधारी गठबंधन पीडीपी और बीजेपी के बीच तनातनी हो गई है। बीजेपी इस एफआईआर को वापस लेने की मांग कर रही है, जबकि पीडीपी ने इसे खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि जांच को तार्किक नतीजे तक पहुंचाया जाएगा। इस बीच सोशल मीडिया पर एफआईआर के दायरे में आए मेजर को बचाने के लिए मुहिम शुरू कर दी गई है।

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