गंगोत्री और केदारनाथ को आपस में सडक़ से जोडऩे से बचेगा पर्यावरण और ईंधन

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— राजेश्वर पैन्यूली /
/ नई दिल्ली। केंद्र सरकार को अपनी ऑल वेदर रोड योजना पर पुर्नविचार करना चाहिए। यदि सरकार उत्तराखंड में चारधाम जोडऩे की इस योजना के तहत गंगोत्री और केदारनाथ को आपस में सडक़ से जोड़ देती है तो इससे लगभग 100 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। इससे पर्यावरण और ईंधन दोनों की बचेंगे।
उत्तराखंड राजनैतिक स्वाभिमान मंच लगातार धार्मिक मान्यताओं और पलायन रोकने के लिए ऑलवेदर रोड को उत्तरकाशी से वाया प्रतापनगर केदार नाथ और बद्रीनाथ को जोडऩे की मांग करता रहा है। इसके लिए मंच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तराखंड मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत केंद्रीय परिवहन एवं सडक़ मंत्री  नितिन गडक़री,टिहरी लोकसभा सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, पूर्व मुख्यमंत्री बी सी खन्ड़ूडी  व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत  को पत्र लिखा है।
इसमें कहा गया है कि चार धाम आल वेदर रोड प्रोजेक्ट के अन्तर्गत गंगोत्री धाम को सीधा केदारनाथ धाम से जोड़ा जाना चाहिए। यह संपर्क मार्ग डुंडा ब्लॉक उत्तरकाशी-प्रतापनगर ब्लॉक टिहरी -घनसाली, देवप्रयाग, टिहरी गढ़वाल होये हुए बनाया जा सकता है।
हिन्दू मान्यताओं  एवं पौराणिक कथाओ के अनुसार चारधाम की  यात्रा का शुभारंभ पश्चिम से पूर्व तक दक्षिणावर्त दिशा में की जानी चाहिए।  इसी मान्यता के अनुसार चारधाम यात्रा यमुनोत्री धाम से प्रारम्भ होकर गंगोत्री, केदारनाथ होते हुये बद्रीनाथ धाम पर समाप्त होती है। यह लोकप्रिय यात्रा अप्रैल मई मे प्रारंभ होकर अक्टूबर नवंबर तक कपाट बंद होने तक जारी रहती है ।उत्तराखंड सरकार भी इस यात्रा को बढावा देने का निरंतर प्रयास कर रही है जिसमें खरसाली मुखबा जोशीमठ और उखीमठ आदि स्थान शामिल है । वर्तमान इस पर 12हजार करोड़ रुपये के  प्रोजेक्ट में निम्नलिखित मार्ग शामिल है । ऋषिकेश से धरासू, धरासू से गंगोत्री,धरासू से यमुनोत्री,ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग,रुद्रप्रयाग से केदारनाथ,रुद्रप्रयाग से बद्रीनाथ।
गौरतलब है कि यह सभी पुराने परम्परागत यात्रामार्ग है । प्रोजेक्ट के अन्तर्गत केवल इन पुराने मार्गो के चौडीकरण करके इसे सुगम बनाया जायेगा ।  लेकिन इस प्रोजेक्ट में कहीं से भी दूरी कम करने के वैकल्पिक मार्ग  को शामिल नहीं किया गया है । साथ ही गंगोत्री से सीधा केदारनाथ  और बद्रीनाथ को जोडने की कोई भी योजना इस प्रोजेक्ट में नही है ।  पत्र के माध्यम से सुझाव दिया गया है कि यदि चार धाम आल वेदर रोड प्रोजेक्ट के तहत गंगोत्री धाम को केदारनाथ से सीधे जोड़ा जाए तो कुल यात्रा की दूरी 100 किलोमीटर तक कम हो सकती है।  जिससे  कम लागत में यात्रा को अधिक सुगम एवं सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
अभी यात्रियों को यमुनोत्री से देवप्रयाग वापस आकर फिर केदारनाथ जाना पड़ता है।  जबकि वैकल्पिक मार्ग बन जाने के बाद तीर्थयात्री सीधे केदारनाथ जा सकते हैं। इससे धन और समय की भी बचत होगी। हिमालयी पर्र्यावरण भी बचेगा। यह वैकलिप्क मार्ग बन जाने के बाद गंगोत्री से केदारनाथ और बद्रीनाथ की दूरी बहुत कम होने के साथ ही यात्रा अधिक सुरक्षित व सुविधाजनक होगी।
इस मार्ग के विकसित होने से यात्री  पौराणिक मंदिरों- बूढ़ाकेदार ,सेम मुखैम आदि के दर्शन भी कर पाएंगे। नचिकेता ताल और खैट पर्वत जैसै पर्यटन स्थल भी विकसित होगे। आल वेदर रोड के बनने से कई अन्यपर्यटन स्थल भी विकसित होंगे।
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CA राजेश्वर  पैन्यूली

 

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