कविता —आँखों से निकल गया कोई — — तनूजा उप्रेती

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क्या हुआ कि दिल से उतर गया कोई।
अश्क़ सा आँखों से निकल गया कोई।
उसने जाहिर की शख़्सियत उसकी।
और मेरे भीतर से…मर गया कोई।
किसी रहबर की जरूरत नहीं रही।
ऐसा सबक दे के गुज़र गया कोई।
अब भी हर बात पे रूँधता है.. गला।
कैसे कह दें कि ग़म से उबर गया कोई।
वो ख़ंज़र तो था हिफ़ाज़त के वास्ते।
और उसी से …क़त्ल कर गया कोई।
अंदाज़े बयां का ये नया रंग है कैसा।
गुले अल्फाज़ कांटों से बदल गया कोई।

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