जब ठ्यकर्या शब्द सुुनकर चौंक गए मुख्यमंत्री रावत

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नई दिल्ली। 11 अगस्त, 2017। ‘उत्तराखंड आन्दोलन-स्मृतियों का हिमालय’ पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार हरीश लखेड़ा ने कहा कि इस पुस्तक में आंदोलन में दिल्ली वालों की भूमिका का विस्तार से जिक्र है। जबकि उत्तराखंड के लोग दिल्ली वालों को ‘ठ्यकर्या’ कहते रहे हैं।
‘ठ्यकर्या’ शब्द सुनते ही मुख्यमंत्री रावत चौक गए। उन्होंने कहा कि वे यह शब्द पहली बार सुन रहे हैं। इसका मतलब क्या  है।  लखेड़ा ने कहा कि आंदोलन के बाद जब दिल्ली वाले उत्तराखंड में अपना राजनीति भविष्य तलाशने गए तो उनके लिए वहां कहा गया कि देखो ‘ठ्यकर्या’ आ गए हैं। इस बात का किताब में भी जिक्र है। लखेड़ा ने कहा इस मौके पर उपस्थित धीरेंद्र प्रताप का उल्लेख करते हुए कि तब उन्होंने इस बारे में एक बयान भी दिया था। जिसका जिक्र किताब में है।
दिल्ली वालों की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस किताब में भी जिक्र है कि उत्तराखंड महासभा के अध्यक्ष हरिपाल रावत ने बताया था कि असम के नेता सोलोमन कहते थे कि दिल्ली में जितने लोग उत्तराखंड के हैं यदि उतने लोग असम के होते तो उनको असम में रेल की पटरियों उखाडऩे की आवश्यकता न होनी।  लखेड़ा ने कहा कि दिल्ली के उत्तराखंडियों की उत्तराखंड  आंदोलन में महत्वपूर्ण  भूमिका रही है। इसे उत्तराखंड में रह रहे लोगों को याद रखना चाहिए।
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