उत्तराखंड में दलबदलू के बाद अब सभी के गनर हटांए त्रिवेंद्र सरकार

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देहरादून। केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में दो मंत्रियों सहित नौ नेताओं को मिली विशेष सुरक्षा हटा कर बेहतर काम किया है। अब प्रदेश सरकार को चाहिए कि उन नेताओं के गनर भी हटा लें जो स्टेटस सिंबल के तौर पर सुरक्षा लिए रहते हैं।
प्रदेश में लगभग डेढ़ सौ नेता ऐसे हैं जिनको गनर मिले हुए हैं। इनमें से ज्यादातर खुद को बड़ा नेता घोषित कराने के लिए जुगाड़ करने गनर लिए हुए हैं। जबकि उनको किसी से भी जान का खतरा नहीं है।
केंद्र सरकार ने कांग्रेस के ज्यादातर दलबदलुओं की सुरक्षा हटाने का फैसला किया है। वे नेतागण पिछले साल 18 मार्च को तत्कालीन कांग्रेस सरकार के बजट सत्र के दौरान पार्टी से बगावत कर भाजपा में चले गए थे। केंद्र सरकार ने प्रदेश के दो मंत्रियों, हरक सिंह रावत व सुबोध उनियाल के अलावा तीन मौजूदा भाजपा विधायकों और पिछले साल कांग्रेस से बगावत करने वाले चार अन्य पूर्व विधायकों को केंद्र की ओर से दी जा रही सुरक्षा व्यवस्था समाप्त कर दी है। तब बजट सत्र के दौरान तत्कालीन हरीश रावत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हरक सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा समेत नौ विधायक सरकार के खिलाफ बगावत कर भाजपा में चले गए थे। इसके बाद केंद्र की भाजपा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, विधायक सुबोध उनियाल, प्रदीप बत्रा, अमृता रावत, शैलारानी रावत, डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल, उमेश शर्मा काऊ व कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को विशेष सुरक्षा प्रदान की थी। इनकी सुरक्षा में अद्र्धसैनिक बलों के जवान लगाए गए थे।
बाद में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बागियों में से दो शैलेंद्र मोहन सिंघल व शैलारानी रावत चुनाव हार गए, जबकि विजय बहुगुणा व अमृता रावत ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। केंद्र सरकार ने इन सभी को दी जा रही अद्र्धसैनिक बलों की सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया है। केंद्र ने प्रदेश सरकार को पत्र भेज कर कहा है कि इन नेताओं को केंद्र की ओर से दी जा रही सुरक्षा 22 जुलाई तक ही रहेगी। इसके बाद इनकी सुरक्षा के लिए उत्तराखंड सरकार अपने स्तर से निर्णय ले सकती है।
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