यमुना में प्रदूषण मामले पर अब रोजाना सुनवाई करेगा राष्ट्रीय हरित ट्राइब्यूनल

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित ट्राइब्यूनल 8 मई से यमुना में प्रदूषण रोकने से जुड़े मुद्दों की रोजाना सुनवाई करेगा। ट्राइब्यूनल ने कहा है कि यदि ‘मैली से निर्मल यमुना रीवाइटलाइजेशन प्रॉजेक्ट 2017’ के निर्देशों के संबंध में किसी विभाग की तरफ से कोई लापरवाही पाई गई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रीय हरित ट्राइब्यूनल  अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र की अगुवाई वाली बेंच ने मनोज मिश्रा की यमुना में प्रदूषण रोकने से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित विभागों को यह चेतावनी दी। डीडीए की ओर से उस वक्त ट्राइब्यूनल के सामने मौजूद ऐडवोकेट कुश शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने नदी से जुड़े सारे मामले एनजीटी के पास वापस ट्रांसफर कर दिए हैं। इसीलिए ट्राइब्यूनल ने अब इस पर सोमवार से रोजाना सुनवाई करने की बात कहते हुए सभी विभागों को चेताया है कि वह देखेगा कि ‘मैली से निर्मल यमुना रीवाइटलाइजेशन प्रॉजेक्ट 2017’ के संबंध में जारी उसके निर्देशों का संबंधित विभागों ने अब तक कितना पालन किया है। यदि किसी विभाग के काम में खामी पाई गई तो उसकी सैलरी अटैचमेंट के अलावा आपराधिक केस भी शुरू किया जा सकता है।
राष्ट्रीय हरित ट्राइब्यूनल ने 13 जनवरी 2015 में यमुना में प्रदूषण कम करने और उसे फिर से निर्मल बनाने के संबंध में अपना फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ये मामले एनजीटी के पास वापस भेज दिए हैं।

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