स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बुरांश का जूस

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बुरांश के फूल का जूस  हृदय रोग, किडनी, लिवर के अलावा रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने और हड्डियों को सामान्य दर्द के लिए बहुत लाभदायी होता है। राज्य वृक्ष और इतने सारे औषधीय  गुण होने के बावजूद भी बुरांश के फूलों का वैज्ञानिक तौर पर उपयोग नहीं होता है।स्थानीय स्तर पर ही इस के फूलों का जूस बनाया जाता है। यदि इस का ब्यवसायिक उपयोग के लिए प्रयोग किया जाये तो इससे प्रदेश का राजस्व भी बढ़ सकता है।
भारत में  बुरांश  के पेड़ उत्तराखंड और हिमांचल प्रदेश में 1800-3600 मीटर की मध्यम ऊँचाई वाले मध्य हिमालयी क्षेत्र में पाये जाते है। उत्तराखंड सरकार ने बुरांश को राज्य वृक्ष घोषित किया है। नेपाल में बुरांश  के फूल को राष्ट्रीय फूल का औहदा हासिल है। बुरांश  सदाबहार पेड़ है। बुरांश के पेड़ भारत के अलावा नेपाल, बर्मा, श्रीलंका, तिब्बत, चीन, जापान आदि देशों में पाये जाते है। अंग्रेज इसे रोह्डोडेन्ड्रान कहते है। इस पेड़ की विश्व में एक सौ से ज्यादा प्रजातियॉ है। प्रजाति और ऊँचाई के आधार पर बुरांश के फूलों का रंग भी अलग-अलग होता है। सूर्ख लाल, गुलाबी, पीला और सफेद। ऊँचाई बढऩे के साथ बुरांश का रंग भी बदलता रहता है। कम ऊँचाई वाले इलाकों में बुरांश के फूल का रंग लाल होता है। जबकि अधिक ऊँचाई वाले इलाकों में बुरांश के फूल का रंग सफेद होता है।
बसंत ऋतु में 1500 मीटर से अधिक हिमालयी क्षेत्र में बुरांश के फूल सभी को अपनी ओर आकृषित करता है। बुरांश दिखने मे ही सुंदर नहीं होता इस में कई लाभदाई गुण होते हैं। इसलिए ही प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में बुरांश को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
रोडोडेंड्रोन प्रचाति के इस पेड़ में सीजन में ही फूल खिलते हैं। इन फूलों का रंग लाल, गुलाबी और सफेद होता है। लेकिन लाल बुरांश सबसे ज्यादा औषधिय गुणों से भरपूर होता है।

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