अपने ही राज्य में पराए हो गए ग्रेजुएशन में दाखिला पाने वाले बच्चे

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देहरादून।  उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्ध इंटर कालेजों से इंटरमीडिएट पास करने वाले छात्रों को अब स्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए बोनस अंक नहीं मिलेंगे।हाईकोर्टके आदेश के बाद  यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई में इस व्यवस्था को न केवल असंवैधानिक बताया, बल्कि तत्काल प्रभाव से इस नियम को रद्द भी कर दिया है। लिहाजा, कॉलेजों ने इस पर अमल शुरू कर दिया है। इस फैसले का असर इस साल होने वाले ग्रेजुएशन के दाखिलों पर पड़ेगा। आईसीएसई और सीबीएसई बोर्ड के छात्रों की मेरिट की तुलना में उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों का अंक प्रतिशत नीचे रहता रहा है। छात्रों को प्रोत्साहित करने की गरज से बोनस अंक दिए जाने की व्यवस्था की गई थी। उन छात्रों को पांच से दस प्रतिशत बोनस अंक दिए जाते थे, जो उत्तराखंड बोर्ड से 12वीं पास करके बीए, बीकॉम, बीएससी में दाखिले लेते थे। उदाहरण के  तौर पर  यदि किसी यूके बोर्ड के छात्र के 12वीं में 55 परसेंट अंक हैं तो उसे अतिरिक्त दस प्रतिशत जोड़कर सीधे 65 परसेंट माना जाता था। इस 65 प्रतिशत के आधार पर ही उसे मेरिट में जगह दी जाती थी। पहले कुछ कॉलेजों में यह व्यवस्था थी, लेकिन वर्ष 2014 में सरकार ने सीधे तौर पर दस प्रतिशत बोनस अंक का नियम लागू कर दिया था। इसका शासनादेश जारी होने के बाद कॉलेजों में दाखिले शुरू हो गए थे। लेकिन, गत वर्ष एक छात्रा ने शहीद दुर्गा मल्ल राजकीय महाविद्यालय डोईवाला में हुए दाखिलों को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद उत्तराखंड बोर्ड के 12वीं के छात्रों को बोनस अंक दिए जाने के नियम को असंवैधानिक करार देते हुए इसे तत्काल खत्म करने का आदेश जारी कर दिया।
इस आदेश के अनुक्रम में अब कॉलेजों ने भी इसे लागू कर दिया है। लिहाजा, इस साल किसी भी उत्तराखंड बोर्ड के छात्र को ग्रेजुएशन के दाखिलों में बोनस अंक नहीं दिए जाएंगे। साथ ही, कुमाऊं विवि में कर्मचारियों व फैकल्टी के बच्चों को तीन से पांच बोनस अंक नहीं दिए जाएंगे।

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