देहरादून। उत्तराखंड की विधानसभा भवन के पीछे जो गंदा नाला दिखता है वही है रिस्पना नदी। देहरादून शहर के बीचों बीच से कभी निर्मल धारा वाली नदी अब गंदा नाले में तब्दील हो चुकी है।  दिल्ली में जैसी यमुना है ठीक उसी तरह देहरादून में रिस्पना व बिंदाल जैदी नदिया हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने अब 27 अप्रैल को इस नदी के पुनरोद्धार के लिए कार्यक्रम का ऐलान किया। इसके पीछे प्रदेश की एक बेटी गायत्री पेगवाल का प्रयास रहा है। देहरादून की 11 वीं कक्षा की छात्रा गायत्री पेगवाल  ने प्रधानमंत्री से रिस्पना नदी की हालात का जिक्र किया था।  इसके बाद मोदी ने 26 मार्च को ‘मन की बात कार्यक्रम’  में देश को संबोधित करते हुए रिस्पना नदी का भी जिक्र किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत भी सक्रिय हो गए    ।
गुरुवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रिस्पना नदी व सुसवा नदी में स्वच्छता कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री रावत ने दोनों ही जगह एक विशेष जैविक पदार्थ का छिडक़ाव किया। यह जैविक पदार्थ दुर्गन्ध को समाप्त कर देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के शहरों व नदियों की स्वच्छता व निर्मलता के साथ ही उन्हें दुर्गन्ध मुक्त करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत के स्वप्न को पूरा करने के लिए हम पूरा प्रयास कर रहे हैं।

प्रायोगिक तौर पर कुछ दिन पूर्व सहस्त्रधारा रोड़ स्थित डम्पिंग ग्राउंड में इसका छिडक़ाव किया गया था। वहां दुर्गन्घ समाप्त करने में सफलता भी मिली थी। इसकी पुष्टि वहीं के स्थानीय लोगों द्वारा की गई है। आज विधानसभा के निकट रिस्पना में व सपेरा बस्ती के निकट सुसवा नदी में भी प्रयोग के तौर पर जैविक पदार्थ का छिडक़ाव किया गया है। यहां सफलता मिलने पर यह काम बड़े पैमाने पर अभियान के रूप में किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री रावत ने मौके पर मौजूद एमडीडीए के अधिकारियों को देहरादून में रिवर फ्रन्ट डेवलपमेंट में किए गए कार्य व आगे की कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, मदन कौशिक, डॉ. हरक सिंह रावत, अरविंद पाण्डे, विधायक उमेश शर्मा काउ, खजानदास, मुख्य सचिव एस. रामास्वामी सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्य सचिव श्री एस रामास्वामी को निर्देश दिए हैं कि रिस्पना नदी को पुनर्जीवित किया जाए। देहरादून की नदियों को निर्मल व दुर्गन्धमुक्त बनाने के लिए आर्ट ऑफ लिविंग से जुडे विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाएगा। गुरूवार को रिस्पना व सुसवा नदियों में स्वच्छता अभियान में प्रतिभाग के बाद सचिवालय में आर्ट ऑफ लिविंग के प्रतिनिधिमण्डल के साथ बैठक में तय किया गया कि रिस्पना व सुसवा नदी को पुनर्जीवित करने के लिए उसके उद्गम स्थल से शुरूआत की जाएगी। इसमें आर्ट ऑफ लिविंग से जुडे वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए एन्जाईम ‘इकोजाईम’ का प्रयोग किया जाएगा जो कि सोलिड वेस्ट व गंदे पानी से दुर्गन्ध दूर कर देता है और सोलिड वेस्ट को उर्वरक में परिवर्तीत कर देता है। बताया गया कि इसके लिए इन नदियों में बहुत ही छोटे-छोटे चैक डैम बनाने पर अधिक अच्छा परिणाम मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि विश्वविद्यालयों को भी नदियों की निर्मलता के लिए अनुसंधान करने के लिए कहा जाए। बैठक में प्रमुख सचिव श्री आनंदवर्धन, आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़े वैज्ञानित श्री अनिल कपूर, श्री राजेंद्र धवन, श्री अरविंद पांडे, श्री शरद ठाकुर सहित अन्य उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री तक रिस्पना की दास्तां पहुंचने की कहानी—
गायत्री पेगवाल की बात मोदी तक पहुंच जाने के बाद उन्होंने तक मन की बात कार्यक्रम  में कहा था कि मुझे देहरादून से गायत्री नाम की एक बिटिया ने, जो कि 11वीं की छात्रा है, उसने फोन करके एक मैसेज भेजा है –
‘आदरणीय, प्रधानमंत्री जी, आपको मेरा सादर प्रणाम।  सबसे पहले तो आपको बहुत बधाइयाँ कि आप इस चुनाव में आपने भारी मतों से विजय हासिल की है। मैं आपसे अपने मन की बात करना चाहती हूँ। मैं कहना चाहती हूँ कि लोगों को यह समझाना होगा कि स्वच्छता कितनी जरूरी है।  मैं रोज उस नदी से हो कर जाती हूँ, जिसमें लोग बहुत सा कूड़ा-करकट भी डालते हैं और नदियों को दूषित करते हैं। वह नदी रिस्पना पुल से होते हुए आती है और मेरे घर तक भी आती है । इस नदी के लिये हमने बस्तियों में जा करके हमने रैली भी निकाली और लोगों से बातचीत भी की, परन्तु उसका कुछ फायदा नहीं हुआ। मैं आपसे ये कहना चाहती हूँ कि अपनी एक टीम भेजकर या फिर न्यूजपेपर के माध्यम से इस बात को उजागर किया जाए, धन्यवाद ।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने कहा था कि   11वीं कक्षा की एक बेटी की कितनी पीड़ा है 7 उस नदी में कूड़ा-कचरा देख कर के उसको कितना गुस्सा आ रहा है । मैं इसे अच्छी निशानी मानता हूँ । मैं यही तो चाहता हूँ, सवा-सौ करोड़ देशवासियों के मन में गन्दगी के प्रति गुस्सा पैदा हो। एक बार गुस्सा पैदा होगा, नाराजगी पैदा होगी, उसके प्रति रोष पैदा होगा, हम ही गन्दगी के खिलाफ़ कुछ-न-कुछ करने लग जाएँगे।  और अच्छी बात है कि गायत्री स्वयं अपना गुस्सा भी प्रकट कर रही है, मुझे सुझाव भी दे रही है, लेकिन साथ-साथ ख़ुद ये भी कह रही है कि उसने काफी प्रयास किए, लेकिन विफलता मिली । जब से स्वच्छता के आन्दोलन की शुरुआत हुई है, जागरूकता आई है  हर कोई उसमें सकारात्मक रूप से जुड़ता चला गया है । उसने एक आंदोलन का रूप भी लिया है । आज की मेरी ‘मन की बात’ में गायत्री की बात जो भी सुन रहे हैं, मैं सारे देशवासियों को कहूँगा कि गायत्री का संदेश हम सब के लिये संदेश बनना चाहिए ।…………….
खास बात य है कि प्रधानमंत्री की मन की बात के बाद देहरादून के तब के मेयर विनोद चमोली ने दीपनगर क्षेत्र के सफाई सुपरवाइजर प्रेम गौड़ को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।  गायत्री दीपनगर क्षेत्र में ही निवास करती हैं और उन्होंने इसी क्षेत्र में रिस्पना नदी में गिर रही गंदगी का मामला उठाया था। चमोली ने गंदगी से मरणासन्न हालत में पहुंच चुकी रिस्पना व बिंदाल नदी के पुनर्जीवन के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की बात कही। हालांकि, वृहद शुरुआत से पहले नदियों की फौरी सफाई के लिए उन्होंने 10 लाख रुपये का बजट भी जारी किया। इसके अलावा नगर निगम की टीम ने  तब दीपनगर क्षेत्र में रिस्पना नदी में सफाई अभियान चलाया था।
राज्य गठन के बाद से किसी ने भी नहीं ली थी सुध–
रिस्पना नदी विधानसभा भवन के ठीक पीछे है। दीपनगर भी वहीं है। फिर भी राज्य गठन के बाद के इन 17 वर्षां में किसी भी मुख्यमंत्री ने इस नदी की सुध नहीं ली। रिस्पना-बिंदाल नदियों की दुर्दशा के लिए सरकारी तंत्र पूरी तरह जवाबदेह है।
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गायत्री पेगवाल–
देहरादून के दीपनगर में रहने वाली गायत्री पेगवाल राजकीय बालिका इंटर कॉलेज अजबुरकलां में 11वीं की छात्रा है। उसका घर नदी के पास ही है। पिता गुलाब सिंह  की वेलडिंग की दुकान है जबकि मां छाया देवी घर संभालती हैं। गायत्री के अनुसार स्कूल आते-जाते वह अक्सर लोगों को रिस्पना में कचरा डालते देखती थी। इससे उसे दुख होता था। उसने इस बारे में अपने शिक्षकों से भी बात की। उन्हीं के मार्गदर्शन से एनएसएस के तहत क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों से  नदी में कूड़ा न डालने की अपील की गई। एक दिन प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ सुनने पर मामला प्रधानमंत्री तक पहुंचाने की इच्छा हुई और वे अपने मिशन में कामयाब हो गई।

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