लगन और व्यवहार कुशलता से इन ऊंचाईयों तक पहुंचे हैं अनिल बलूनी

0
503

नई दिल्ली। भाजपा के मीडिया विभाग के राष्ट्रीय प्रमुख अनिल बलूनी अपनी लगन, कार्य और व्यवहार कुशलता से ही भाजपा में ऊंचाईयों तक पहुंचे हैं। भाजपा में  जिन नेताओं का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से सीधा संवाद होता है उनमें बलूनी भी शामिल हैं।
काम के प्रति समर्पण को देखकर ही शाह ने बलूनी को भाजपा में अहम जिम्मेदारी सौंपी है। दिल्ली के मयूर विहार क्षेत्र में पले-बढ़े बलूनी ने शुरूआती दौर में पत्रकारिता भी की। हिमालय दर्पण, दैनिक जागरण आदि अखबारों में रिपोर्टिंग में रहे लेकिन मन राजनीति की ओर झुका रहा। इसलिए भाजपा के कार्यालय में जाने लगे। वहां वे तब भाजपा के उपाध्यक्ष व वरिष्ठ नेता सुंदर सिंह भंडारी के संपर्क में आए। तब नरेंद्र मोदी भाजपा के संगठन मंत्री थे और उसी दौर से बलूनी को मोदी का भी मार्गदर्शन मिलने लगा था।
केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार आने पर भंडारी जी को बिहार का राज्यपाल बनाया गया। वे बलूनी को अपना विशेष कार्याधिकारी बना कर ले गए। वहां बलूनी बिहार भाजपा नेताओं के वरिष्ठ नेताओं के भी संपर्क में आ गए। तक बिहार केे मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव थे और उनकी हरकतों से राज्यपाल भंडारी नाखुश थे। इस पर भंडारी जी को गुजरात भेज दिया गया। बलूनी वहां भी राज्यपाल उनको अपना विशेषकार्याधिकारी बना कर ले गए।
तक गुजरात में केशुभाई की सरकार थी। राजनिवास में रहते हुए मोदी के साथ ही अमित शाह से उनकी घनिष्ठता बढती चली गई। उत्तराखंड राज्य बनने पर 2002 में विधानसभा के पहले चुनाव में बलूनी कोट्दवार सीट से मैदान में भी उतरे लेकिन तकनीकी कारणों से उनका नामांकन रद्द कर दिया गया। अनिल मामले को सर्वोच्च अदालत तक ले गए और लंबे संघर्ष के बाद चुनाव रद्द हो गया। हालांकि बाद में हुए चुनाव में उनको सपलता नहीं मिली क्योंकि तब प्रदेश में कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी की सरकार थी।
बहरहाल, बलूनी उत्तराखंड भाजपा में कई प्रमुख पदों पर रहसे हुए संगठन के लिए काम करते रहे। 2007 में भाजपा सत्ता में आ गई। पहले तो मेजर जनरल खंडूड़ी और फिर रमेश पोखरियाल निशंक व फिर खंडूड़ी मुख्यमंत्री बने। निशंक के कार्यकाल में  उनको वन और पर्यावरण संरक्षण समिति का प्रमुख बनाया गया।  उस दौर में अनिल ने वन और पर्यावरण मामलों में महारथ हासिल कर दी थी। वे उत्तराखंड के लगगभ हर बड़े जंगलों में घूमें। उनके प्रयासों से ही वन्य जीव तश्कर संसार चंद पकड़ा गया था। उन्होंने तब भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भी जिम कार्बेट नेशनल पार्क का एंबेसडर बनाने का प्रयास किया था।
वन और पर्यावरण के मद्दों पर गहरी पकड़ होने से ही बलूनी की तब केंद्र में यूपीए सरकार के वन व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश से लगातार भिडंत होती रही। उत्तराखंड में लोग तब के वन मंत्री से ज्यादा बलूनी को जानते थे।
केंद्र में  नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बन जाने और भाजपा की कमान अमित शाह के हाथ आने के बाद अनिल को पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया। अब हाल  में मीडिया प्रकोष्ठ को विभाग का दर्जा मिल जाने के बाद अनिल को उसकी कमान सौंप दी गई। यह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के बराबर का पद है। पार्टी के सभी प्रवक्ता और पैनलिस्ट उनकी टीम का हिस्सा हैं। अनिल को वर्षों से जानने वाले कई वरिष्ठ पत्रकार व भाजपा के नेतागण कहते हैं कि बलूनी को यह सब उनकी लगन, कार्यकुशलता और व्यवहार कुशलता का फल मिला है और वे अपनी मेहनत से ही वे इन ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं।
————-

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here