नोएडा।  एक साल होने को है।   नोएडा के  सेक्टर 22 में रहने वाली कशिश रावत  12 मई 2016 को खेलने के लिए बाहर गई थीं लेकिन  वह  लौटकर घर पर नहीं आई। गायब हुई बच्ची के माता पिता परेशान हो कर उसे ढूंढने लगे। थक-हार कर जब कोई पता न चला तो उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट की।  आज 10 महीने बीत चुके हैं लेकिन कशिश रावत अब तक नहीं मिली है.

यूपी पुलिस की नाकामी है यह।  अब नए मुख्यमंत्री योगी  आदित्य  नाथ से उम्मीद है। तब कशिश को तलाशने के लिए देश भर में पोस्टर लगाए जाने थे. लेकिन  नोएडा पुलिस ने  हजारों पोस्टर कूड़े में डाल दिए।  तब  कशिश की मां सरिता रावत ने पोस्टर देखा तो उसे बटोरने लगी. थीं।  सरिता ने बताया था कि जब हमने पोस्टर चिपकाने के लिए मांगे तो पुलिस ने कहा कि पोस्टर हैं ही नहीं. कशिश को तलाशने के लिए मुहिम  चलाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता कुसुम ने बताया कि बहुत सारे पोस्टर हमने खुद के पैसे से छपवाए थे. लेकिन पुलिस ने कुछ दिन बाद अपनी जांच बन्द कर दी.  चौकी से मिली जानकारी के मुताबिक, कबाड़ में मिले पोस्टर पुलिस ने छपवाए थे.पिछले साल 12 मई को नोएडा से चार साल की कशिश अपने घर के बाहर खेलते खेलते गुम हो गयी थी. उसके बाद उसे खोजने की काफी कोशिश हुई, लेकिन वो नहीं मिली. आज 11  महीने बीत चुके हैं लेकिन कशिश रावत अबतक नहीं मिली है.

उत्तराखंड के  लोगों ने  उत्तर प्रदेश  के  मुख्यमंत्री माननिय योगी आदित्यनाथ से  कशिश को तलाशने की  प्रार्थना की है। पत्रकार  सुनील नेगी  कहा कि उत्तर प्रदेश की पूर्व  समाजवादी सरकार और  नॉएडा पुलिस के गाल पर एक जबरदस्त तमाचा है की एक गरीब परिवार की 12 मई 2016 से गायब हुई पांच साल की होनहार बच्ची   को वह परिवारजनों के  लाख अनुरोधों  और कई प्रदर्शनों और सरकार को दिए गए असंख्य ज्ञापनों के बाद भी आज तक नहीं ढूंढ पायी. कितने शर्म और दुःख की बात है की 12 महीनों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी खामोश हैं. ये मामला नॉएडा सिटी के सीनियर पुलिस अधीक्षक से लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व  मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तराखंड के सभी सांसदों ,  पूर्व मुख्यमंत्री की सांसद  पत्नी डिम्पल  यादव सहित मीडिया के संज्ञान में कई मर्तबा लाया जा चूका हे और सोशल नेटवर्किंग साइट्स फसबूक व् ट्विटर पर मैंने स्वयं इस मुद्दे को प्रधानमंत्रीजी, गृहमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के ट्विटर एकाउंट्स में भी डाला , लेकिन मजाल क्या किसी ने इस मुद्दे को संज्ञान में लिया हो. सभी जानते है की उत्तरप्रदेश और देश में इन दिनों चाइल्ड ट्रैफिकिंग का गैर कानूनी धंधा जोरों पर फलफूल रहा है. लेकिन नॉएडा पुलिस अभी तक इस मामले को हल नहीं कर पायी. अब पानी सर से ऊपर निकल चूका है. उत्तराखंड जर्नलिस्ट्स फोरम के अध्यक्ष के नाते मैं उत्तर प्रदेश सरकार के मौजदा  मुखिया माननीय योगी  आदित्यनाथ जी  से अनुरोध करता हूँ की वे इस मामले में व्यक्तिगत दिलचस्पि लें और कशिश को ढूंढने में हमारी मदद वार्ना दिल्ली, नॉएडा और उत्तराखंड की जनता को पुनह  संघर्ष का रास्ता अख्तियार करने पर बाध्य होना पड़ेगा. हमे  पुरा विश्वास  है  कि मुख्यमत्री ज़ो  कि मूलत: स्वयं  गढवाल उत्तरiखण्ड  से तालुक्क रखते हैं, 6 वर्षिय कशिश रावत को ढूंदने और उसके घूनहगारों को कानुन के  शिकंजे में  कसने की दिशा  में  कोई  कोर  कसर नही   छोड़ेगे. देश  का  उत्तराखण्डी समाज और कशिश के  कुंठीत माता  पिता उनके हमेशा ऋणी  रहेगा . ऐसे  इस  देश  में  न जाने  कितने  अभागे  बच्चे  होंगे ज़िनके अभागे माता  पिता  उनका वर्षों से  इंतजार  कर  रहे  होंगे?
खास बात है की उत्तर प्रदेश की पुलिस कुछ समाया पहले  स्नैपडील से गायब हुई दीप्ती सरना का पता 24 घंटे से कम में ही लगा लिया, जो सिर्फ़ 36 घंटों में ही अपने घर पहुंच गई।   जबकि कशिश 12 मई से गायब है। 11 महीने से ज्यादा हो गए हैं । कशिश के माता-पिता की मानें तो पुलिस ने रिपोर्ट तो 12 मई को ही दर्ज कर ली, मगर कार्यवाही अगले दिन 2 बजे से शुरु की। इसपर हमारा सोशल मीडिया भी सो गया है।
जबकि  दीप्ती के गायब होते ही फेसबुक-ट्विटर जैसे सोशल मीडिया पर स्टेटस की बाढ़-सी आ गई थी। मीडिया ने एक ही दिन में उसे इतनी तवज्जो दी, जितनी शायद नॉर्थ-ईस्ट से जुड़े मामलों को पूरे महीने में नहीं मिलती। दीप्ती के पीछे बड़ी कंपनी थी। कोई आशिक था.. कोई जूनूनी था, जो उससे प्यार करता था। लगभग पूरा मसाला था खबर में।   कशिश की तरह दिल्ली-एनसीआर में हर साल लगभग 7000 बच्चे गायब होते हैं, जिनका कुछ पता नहीं चल  पाता है।

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