हिमालयी लोककथा—– सात भाई और राजकुमारी

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बहुत पुरानी बात है। किसी गांव में सात भाई रहते थे। वैसे तो वे बड़े प्यार से मिलकर रहते थे, लेकिन कभी-कभी उनमें झगड़ा हो जाया करता था। छह भाई तो एक ओर हो जाते, एक भाई अकेला पड़ जाता था। जो अकेला पड़ जाता था, वह सबसे छोटा था। वे सब मिलकर उसे बहुत तंग करते थे।
एक दिन झगड़े के दौरान उन्होंने छोटे भाई को घर से निकाल दिया। वह बेचारा दुखी होकर जंगल में चला गया। वहां एक पीपल का पेड़ था। वह उस पीपल के पेड़ के नीचे रहने लगा। उस पेड़ के नीचे रोजाना एक भैंस आती थी। वह भैंस पेड़ के नीचे एक गड्ढे में अपना दूध इकट्ठा करती थी। उस लड़के ने यह देखा तो अपने मन में सोचा, ‘क्यों न मैं इस दूध को पी लिया करूं।’
वह चुपचाप उस दूध को पीने लगा। दूध पीता और रात को पीपल के पेड़ पर सो जाता। इसी तरह कई दिन बीत गए। एक दिन वह भैंस पेड़ के नीचे आकर खड़ी हो गई। उसने रोजाना की तरह दूध दिया। भैंस को प्यास लगी। वह पानी पीने चली गईं। इतने में लड़का पेड़ से नीचे उतरा और उसका दूध पीकर फिर पेड़ पर चढ़ गया।
भैंसे ने उसे देख लिया। वह गुस्से में पेड़ की ओर दौड़ा। लड़के ने भैंसे को अपनी ओर आते देखा।
दूसरे दिन एक भैंसा भी भैंस के साथ आया। भैंस ने दूध दिया और तालाब में पानी पीने चली गई। लेकिन भैंसा थोड़ी दूर जाकर वहां से खड़ा-खड़ा देखता रहा कि देखें भैंस का दूध कौन पीता है। लड़का मजे से नीचे उतरा और दूध पीने लगा।
भैंसे ने उसे देख लिया। वह गुस्से में पेड़ की ओर दौड़ा। लड़के ने भैंसे को अपनी ओर आते देखा तो घबरा गया। वह जल्दी-जल्दी पीपल के पेड़ पर चढ़ गया। भैंसा पेड़ के नीचे खड़े होकर बोला-‘ए लड़के नीचे उतरो।’
लड़का डरा हुआ था। वह नीचे नहीं उतरा। वह जानता था कि बड़े-बड़े सींगों और मोटी-मोटी आंखों वाला यह भयंकर भैंसा उसे मार डालेगा। जब लड़का नीचे नहीं उतरा, तो भैंसे ने पेड़ में टक्कर मारना शुरू कर दिया। पेड़ हिलने लगा। लड़के ने सोचा कि अब तो यह भैंसा इस पेड़ को गिरा देगा। वह भैंसे से बोला ‘तुम पेड़ को मत गिराओ। मैं नीचे उतर रहा हूं।’भैंसे ने कहा-‘तुम पेड़ से नीचे छलांग लगाओ। यदि तुम मेरी पीठ पर सवार हो गए, तो मैं तुमको छोड़ दूंगा, और यदि जमीन पर गिरे तो मैं तुमको मार डालूंगा।’
लड़का भैंसे की शर्त सुनकर चिन्ता में पड़ गया। लेकिन उसने साहस से काम लिया। वह पेड़ से नीचे कूदा और भैंसे की पीठ पर सवार हो गया। भैंसे ने उसे अपनी पीठ पर सवार देखकर अपना वचन निभाया। उसे मारा नहीं और अपना दोस्त बना लिया। लड़का रोज भैंस का दूध छक कर पीता और पीपल के पेड़ पर सो जाता। भैंसे ने एक बांसुरी भी लाकर लड़के को दे दी, जिसे वह मजे से बजाता रहता। एक दिन की बात है। लड़का बांसुरी बजा रहा था। उधर राजा की लड़की अपनी सहेलियों के साथ घूमने आई हुई थी। वह लड़के की बांसुरी की धुन पर मोहित हो गईं। राजकुमारी ने अपने नौकरों को बुलाया और आज्ञा दी-‘इस बांसुरी बजाने वाले लड़के को पकड़ कर हमारे सामने लाओ।’ नौकर लड़के के पास गए और उन्होंने लड़के से अपने साथ चलने को कहा। लड़के ने आने से मना कर दिया। नौकरों ने कहा-‘हम तुझे जबरदस्ती पड़क कर ले जाएंगे।’लड़के ने कहा-‘तुमको नहीं पता। जंगली भैंसा मेरा मित्र है। वह आता ही होगा। तुम सब यहां से भाग जाओ, नहीं तो वह सबको मार डालेगा।’ लड़के की बात सुनकर नौकर डर गए और वहां से लौट आए।
राजकुमारी ने अब अपने सिपाहियों को भेजा। वे लड़के को पकड़ कर राजकुमारी के पास ले आए। राजकुमारी लड़के से बोली-‘हमको अपनी बांसुरी बजाकर सुनाओ।’
लड़के ने मना कर दिया और बोला-‘मेरा दोस्त सो रहा है। वह जाग जाएगा।’ राजकुमारी ने कहा-‘हमारी फौज है। तुम वंशी बजाओ। वह जाग जाएगा और किसी को मारेगा, तो हमारी फौज उसे मार देगी।’लड़के ने बांसुरी बजाई। राजकुमारी बहुत खुश हुई। वह लड़के पर मोहित हो गई। उधर भैंसे ने बांसुरी सुनी तो उसकी नींद टूट गईं। उसने सुना बांसुरी की आवाज महल के भीतर से आ रही थी। भैंसा क्रुद्ध होकर महल की ओर दौड़ा। उसने लड़के से बाहर आने को कहा। लेकिन राजकुमारी के कहने पर उसने बाहर आने से मना कर दिया। भैंसे ने महल की दीवार तोड़ डाली। लड़के ने राजकुमारी को लेकर भैंसे की पीठ पर छलांग लगा दी। दोनों उसकी पीठ पर सवार हो गए। भैंसा उन दोनों को लेकर जंगल की ओर दौड़ने लगा। कोई उनका पीछा नहीं कर सका।अब वह लड़का रजकुमारी के साथ उसी पीपल के पेड़ पर रहने लगा। वे भैंस का दूध पीते, बंशी बजाते और उनका मित्र भैंसा उनकी रक्षा करता था। इस तरह वे सभी मित्र मिल कर रहने लगे।
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