कुमाउंनी लोक कथा –हरुवा और तरुवा

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बहुत पुरानी बात हह। उत्तराखंड के सभी गावों की तरह डंणु गांव के लोग भी अपने ग्राम देवता की पूजा करने के लिए हर मौसम में मंदिरों में जाते थे। थे। गांव के सभी लोग उस देवता की कृपा से सुखी और संपन्न रहते थे। वे हर फसल के कट चुकने पर देवताओं को चढ़ावा चढ़ाने दूर एक स्थान पर जाया करते थे। रास्ते में उनको कई गांव मिलते। गांव वाले उनकी पूजा में अपना हाथ बंटाते और मिलकर पूजा करते थे, सिर्फ ‘बांसुक’ के लोग झगड़ालू थे। उनके गांव से जो भी लोग गुजरते, गांव वाले उसे जाने से रोक देते व रास्ता देने में अड़ंगा डाल देते थे। एक बार डंणु गांव वालों की बारी मंदिर पर चढ़ावा चढ़ाने की थी। सभी लोग एकजुट होकर ढोल, नगाड़ा व तुरही के साथ चल दिए। अन्य  गांवों के लोगों ने अपनी अपनी तरफ से उनको फूलमाला व अनाज उनको दिया। अंत में चलते-चलते वे मंदिर के करीब के गांव बासुक में पहुंचे। उस गांव के खेत से होकर रास्ता जाता था। वहां के लोग उस रास्ते से नहीं जाने देते थे और न ही इस गांव के लोगों ने खेतों में कोई रास्ता छोड़ा था। गांव के मुख्य द्वार पर भी कांटों की बाड़ डाल दी। डंणु गांव के लोगों ने जाने के लिए रास्ते को पाने की काफी कोशिश की लेकिन बासुक गांव के लोग नहीं माने। वे उन लोगों को मारने लगे और मंदिर में पूजा के लिए जाने से रोक दिया। काफी अनुरोध करने पर भी नहीं जाने दिया। अंत में डंणु गांव के प्रधान जिसका नाम तरुवा था और जिसके हाथ में एक लंबी तुरही थी, गुस्से में बहुत जोर से तुरही बजाकर बासुक के लोगों को चेतावनी देने लगा कि हम इस रास्ते से जाकर ही रहेंगे।
बासुक गांव का हरुवा नामक प्रधान गुस्से में आकर बोला-‘हम किसी भी कीमत पर रास्ता देने को तैयार नहीं हैं। तुम्हारे देवता में कोई शक्ति नहीं है।’
तब तरुवा गुस्से मेंआकर बोला-‘हमारा देवता सबसे बढ़कर शक्तिशाली है।’
हरुवा एक शर्त पर मान गया। उसने कहा-‘यह तुरही, जो तरुवा के हाथ में है देवता के नाम पर बजाने पर कोई करिश्मा दिखाए, तो हम एक गज चौड़ा रास्ता देने को तैयार हैं और आपके देवता को पूजने भी चलेंगे।’तरुवा भी इस बात को मान गया और उसने जोर से अपने ‘नौलिंग देवता’ को पुकारा और तुरही को बजाने के लिए बहुत शक्ति से फूंक मारी। तुरही से वह तरह-तरह की ध्वनियां बजाने लगा। उस ध्वनि में कुछ ऐसा जादू था कि गांव वाले मंत्रमुग्ध होकर वहां एकत्र हो गए। यहां तक कि गाय-भैंसें भी वहां आ गईं। दूसरी ओर गांव के प्रधान के घर की छत पर लगे पत्थर अपने आप गिरने लगे।
सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए। बासुक के लोगों ने मान लिया कि देवता की ही शक्ति से यह करिश्मा हुआ है। उसी समय गांव वालों ने एक गज चौड़ा रास्ता दे दिया। देवता की शक्ति को देखकर गांव के स्त्री-पुरुष व बच्चे सभी प्रभावित हुए और धूमधाम से पूजा करने चल पड़े। आज भी यह एक गज का चौड़ा रास्ता देवता के नाम पर खुला हुआ है। इस रास्ते पर सभी गांवों के लोग बड़ी धूमधाम से देवता की पूजा करने जाते हैं और सभी मिलकर श्रद्धा-विश्वास से पूजा-अर्चना करते हैं।

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