सज्जनता का दूसरा नाम हैं गोविंद सिंह

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जम्मू विश्वविद्यालय में पत्रकारिता व जन संचार विभाग के प्रुमख डा. गाविंद सिंह सज्जनता का दूसरा नाम हैं।  दिल्ली में पत्रकारिता में लंबी पारी खेल चुके डा. गोविंद सिंह अब पत्रकार तैयार करने में लगे हैं। इससे पहले वे उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी में पत्रकारिता व जन संचार विभाग के प्रुमख रहे हैं।
डा. गोविंद सिंह जैसे बहुत कम लोग हैं जो पत्रकार रहते हुए भी घमंड व अहंकार से दूर हैं। अन्यथा आजकल अखबारों व खबरची चैनलों में मजदूर जैसी जिंदगी जी रहे पत्रकारों की हेकड़ी देखने लायक होती है। डा. सिंह वास्तव में पहाड़ से सभी संस्कार मिलते हैं। वे पहाड़ जैसे दृढ़ और नदियों जैसे निर्मल व  पहाड़ के लोगों की तरह सरल भी हैं। अपने बारे में वे कहते हैं —
पिथौरागढ़ जिले में एक गांव है सौगांव, जहां आज भी सडक़ नहीं पहुंची है, वहीं जन्म। चंडीगढ़ में पढ़ाई। मुंबई, कोलकाता और दिल्ली में पिछले 30 साल से पत्रकारिता। कई बार पत्रकारिता से बाहर भी छलांग लगाई। पत्रकारिता शिक्षण में भी हाथ आजमाया। धर्मवीर भारती, विश्वनाथ सचदेव, राजेंद्र माथुर, एसपी सिंह, विद्यानिवास मिश्र, विष्णु खरे, सूर्यकांत बाली, आलोक मेहता,लिया तह्र्यून और शशि शेखर के साथ काम किया। अंतत: बहुत पुरानी ख्वाहिश- शिक्षा के क्षेत्र में लौट आया। अब अपनी दो ख्वाहिशों पर एक साथ काम कर रहा हूं। यानी पत्रकारिता भी और शिक्षण भी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के साथ। एक कोशिश जड़ों की ओर लौटने की भी।
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