नई दिल्ली। हर साल 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस  के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरुकता बढ़ाने का काम किया जाता है लेकिन यह दिन रश्म अदायगी मात्र रह गया है।
यदि ऐसा न होता तो आज गंगा-यमुना जैसी नदियां मैदानी क्षेत्रों में गंदा नाला नहीं बनती। भारत की राजधानी दिल्ली प्रदूषण से न घिरी होती। बहरहाल, हर साल लोग 22 अप्रैल को पृथ्वी की सेहत की चिंता करते हैं। विशेष तौर पर जलवायु परिवर्तन के खतरों से लोगों को जागरुक करते हैं। हालांकि यह देखने में आया है कि पर्यावरण के नाम पर दुकानदारी कर रहे लाखों एनजीओ हर साल अर्थ डे के नाम पर  करोड़ों रुपये का न्यारा वारा करते हैं। कुछ कार्यक्रम करते वे फिर साल भर के लिए खामोश हो जाते हैं।
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सबसे पहले 1970 में मनाया गया अर्थ डे —-
1970 में पहले ‘अर्थ डे’  पर अमेरिका में कॉलेज और यूनिवर्सिटीज कैंपसों में लगभग दो करोड़ लोग इक_े हुए थे। अब तक पर्यावरण को लेकर इतना बड़ा आयोजन नहीं हुआ था।  पर्यावरण और प्रदूषण को लेकर लोग फैक्ट्री, पॉवर प्लांट, सीवेज और पेस्टीसाइड्स का विरोध करते थे लेकिन अर्थ डे ने सबको एक साथ एक मंच पर अपनी बात रखने का मौका दिया।
विस्कॉन्सिन के सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने 22 अप्रैल को अर्थ डे के लिए प्रस्तावित किया तो वहीं सैन फ्रांसिस्को के एक्टिविस्ट जॉन मैक्कॉनेल ने 21 मार्च को होने वाले स्प्रिंग इक्विनॉक्स (जब दिन और रात बराबर होते हैं) को इस आयोजन के लिए प्रस्तावित किया था लेकिन आखिर में 22 अप्रैल ही अर्थ डे के लिए चुना गया।
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अर्थ डे के लिए 22 अप्रैल को ही क्यों चुना गया?
वैसे तो इसकी नींव 1872 में ही रख दी गई थी। नेब्रास्का के राइटर और वहां के पहले न्यूजपेपर के एडिटर जे स्टर्लिंग मॉर्टन ने स्टेट बोर्ड ऑफ एग्रीकल्चर की मीटिंग में 10 अप्रैल को वन महोत्सव के लिए प्रस्तावित किया था। उन्होंने सबसे ज्यादा पेड़ लगाने वाली कम्युनिटी को इनाम देने जैसी योजनाएं भी सामने रखी। तब 10 अप्रैल को मनाए जा रहे वन महोत्सव को लीगल हॉलीडे घोषित कर दिया गया और बाद में इसकी तारीख बदलकर मॉर्टन के जन्मदिन 22 अप्रैल को रख दी गई।
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विश्व पृथ्वी दिवस यानी अर्थ डे की स्थापना-
इसकी स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने  1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप में की और अब इसे दुनियाभर के 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है। यह तारीख उत्तरी गोलाद्र्ध में वसंत और दक्षिणी गोलाद्र्ध में शरद का मौसम है। संयुक्त राष्ट्र में पृथ्वी दिवस को हर साल मार्च एक्विनोक्स (वर्ष का वह समय जब दिन और रात बराबर होते हैं) पर मनाया जाता है, यह अक्सर 20 मार्च होता है, यह एक परम्परा है जिसकी स्थापना शांति कार्यकर्ता जॉन मक्कोनेल के द्वारा की गयी।
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