कब तक होती रहेंगी त्यूनी जैसी दुर्घटनाएं

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नई दिल्ली। उत्तराखंड में शायद ही कोई महीना होता होगा जब पहाड़ में बस या कार- टैक्सी खाई में न गिरती हो। हिमाचल के गूमा के समीप त्यूनी भीषण बस हादसा पहाड़ के लिए कोई नया हादसा नहीं है। यहां आए दिन इस तरह की दुर्घटनाएं होती रहती हैं लेकिन सरकारी तंत्र कभी भी सचेत नहीं हो पाया।
त्यूनी  की दुर्घटना के दिन ही लैंसडौन के पास एक जीप खाई में गिर गई और चार लोग मारे गए।  इस तरह की दुर्घटनाओं के पीछे लापरवाही ही सबसे बड़ा कारण होता है। त्यूनी को लेकर कहा जा रहा है कि विकासनगर से त्यूनी(कैराड़) के लिए रवाना हुई बस में मीनस के समीप खराबी आ गई थी। बस के स्टेयरिंग में तकनीकी दिक्कत आ गई थी। बस के खाई में गिरने से पहले संयोगवश गूमा गांव निवासी नरेश ने कूद कर अपनी जान बचाई। नरेशके अनुसार मीनस के समीप बस के स्टेयरिंग का नट निकल गया था। तब चालक ने जुगाड़ कर इसके ठीक कर दिया। उस दौरान यात्रियों ने इस पर ऐतराज भी जताया। बस को सडक़ किनारे खड़ा करने को कहा, लेकिन फिर से बस गंतव्य के लिए रवाना हो गई। यानी साफ है कि खराब बस को नहीं चलाना चाहिए था।
इसके अलावा वाहनों में क्षमता से ज्याद यात्री भर दिए जाते हैं। ड्राइवर भी शराब पीकर वाहत चलाते हैं। तेज गति से भी चलाते हैं। ड्राइवरों को ठीक से प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता है। इन तमाम कारणों से आए निद दुर्घटनाएं हो रही हैं।
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